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सोमवार, 30 जून 2014

"सूरज से आग बरसती है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

   
नदिया-नाले सूख रहे हैंजलचर प्यासे-प्यासे हैं।
पौधे-पेड़ बिना पानी केव्याकुल खड़े उदासे हैं।।

चौमासे के मौसम मेंसूरज से आग बरसती है।
जल की बून्दें पा जाने कोधरती आज तरसती है।।

नभ की ओर उठा कर मुण्डीमेंढक चिल्लाते हैं।
बरसो मेघ धड़ाके सेये कातर स्वर में गाते हैं।।

दीन-कृषक है दुखी हुआबादल की आँख-मिचौली से।
पानी अब तक गिरा नहीक्यों आसमान की झोली से?

तितली पानी की चाहत में दर-दर घूम रही है।
फड़-फड़ करती तुलसी की ठूँठों को चूम रही है।।

दया करो घनश्यामसुधा सा अब तो जम करके बरसो।
रिमझिम झड़ी लगा जाओ, अब क्यों करते कल-परसों?

रविवार, 29 जून 2014

"ग़ज़ल में फिर से रवानी आ गयी है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


हाथ में खोई निशानी आ गयी है
याद फिर भूली कहानी आ गयी है

वक़्त ने की थी शरारत कुछ मगर
अब हमें बिगड़ी बनानी आ गयी है

जंग हो कर जब सुलह हो जाये तो
समझ लो तब रुत सुहानी आ गयी है

फूल को छूना नहीं, लेना महक
अब बगीचे में जवानी आ गयी है

अब ज़माना रास फिर आने लगा
साथ जब संगत पुरानी आ गयी है

हो गया फिर से चमन गुलजार अब
मालियों को बागबानी आ गयी है

“रूप” की जब धूप आँगन में खिली
ग़ज़ल में फिर से रवानी आ गयी है 

शनिवार, 28 जून 2014

"दोहे-आया नहीं सुराज" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')



सबको अच्छे दिनों का, खूब दिखाया स्वप्न।
तीस दिनों में कर दिया, सबको बहुत विपन्न।१।
--
देखे जितने ख्वाब थे, सभी हो गये भंग।
सब कुछ मँहगा हो गया, बिगड़ा जीवन ढंग।२।
--
शासन का रुख देख कर, मन में हुआ मलाल।
इस शासन ने कर दिया, जनजीवन बदहाल।३।
--
नयी पौध को रोपकर, काटा चन्दन वृक्ष।
निर्धन-निर्बल का यहाँ, कौन सुनेगा पक्ष।४।
--
हर-हर, घर-घर आ गया, आया नहीं सुराज।
जिससे खुशहाली बढ़े, नहीं मिला वो राज।५।
--
कुटिल सुनामी आयी थी, बहा ले गयी चैन।
सुख के दिवस चले गये, आयी काली रैन।६।
--
गंगा निर्मल हो भले, बहे भले जल-धार।
मँहगाई को देखकर, आहत है परिवार।७।

शुक्रवार, 27 जून 2014

"ग़ज़ल-फासले इतने न अब पैदा करो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हौसले के साथ में आगे बढ़ो।
फासले इतने न अब पैदा करो।

जिन्दगी तो है हकीकत पर टिकी,
मत इसे जज्बात में रौंदा करो।

चाँद-तारों से भरी इस रात में,
उल्लुओं सी सोच मत रक्खा करो।

बुलबुलों से ज़िन्दगी की सीख लो,
राग अंधियारों का मत छेड़ा करो।

उलझनों का नाम ही है जिन्दगी,
हारकर, थककर न यूँ बैठा करो।

छोड़कर शिकवें-गिलों की बात को,
मुल्क पर जानो-जिगर शैदा करो।

खूबसूरत दिल सजा हर जिस्म में,
 “रूपपर इतना न मत ऎंठा करो।

गुरुवार, 26 जून 2014

"दस दोहे-अन्तरजाल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


मन में तो है कलुषता, होठों पर हरि नाम।
काम-काम को छल रहा, अब तो आठों याम।।
--
लटक रहे हैं कब्र में, जिनके आधे पाँव।
वो ही ज्यादा फेंकते, इश्क-मुश्क के दाँव।।
--
मन की बात न मानिए, मन है सदा जवान।
तन की हालत देखिए, जिसमें भरी थकान।।
--
नख-शिख को मत देखिए, होगा हिया अशान्त।
भोगवाद को त्याग कर, रक्खो मन को शान्त।।
--
रोज फेसबुक पर लिखो, अपने नवल विचार।
अच्छी सूरत देख कर, मत फैलाओ विकार।।
--
सीख बड़ों से ज्ञान को, छोटों को दो ज्ञान।
जीवन ढलती शाम है, दिन का है अवसान।।
--
अनुभव अपने बाँटिए, सुधरेगा परिवेश।
नवयुग को अब दीजिए, जीवन का सन्देश।।
--
भरा हुआ है सिन्धु में, सभी तरह का माल।
जो भी जिसको चाहिए, देगा अन्तरजाल।।
--
महादेव बन जाइए, करके विष का पान।
धरा और आकाश में, देंगे सब सम्मान।।

"बन जाते हैं प्यार से, सारे बिगड़े काम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

"प्यार के दस दोहे"

ढाई आखर में छिपा, दुनियाभर का मर्म।
प्यार हमारा कर्म है, प्यार हमारा धर्म।१।

जो नैसर्गिकरूप से, उमड़े वो है प्यार।
प्यार नहीं है वासना, ये तो है उपहार।२।

जब तक जीवित प्यार है, तब तक है संसार।
प्यार बिना होता नहीं, जग में कोई उदार।३।

जीव-जन्तु भी जानते, क्या होता है प्यार।
आ जाते हैं पास में, सुनकर मधुर पुकार।४।

उपवन सींचो प्यार से, मुस्कायेंगे फूल।
पौधों को भी चाहिए, नेह-नीर अनुकूल।५।

विरह तभी है जागता, जब होता है स्नेह।
विरह-मिलन के मूल में, विद्यमान है नेह।६।

दुनियाभर में प्यार की, बड़ी अनोखी रीत।
गैरों को अपना करे, ऐसी होती प्रीत।७।

बन जाते हैं प्यार से, सारे बिगड़े काम।
प्यार और अनुराग तो, होता ललित-ललाम।८।

छिपा हुआ है प्यार में, जीवन का विज्ञान।
प्यार और मनुहार से, गुरू बाँटता ज्ञान।९।

छोटे से इस शब्द की, महिमा अपरम्पार।
रोम-रोम में जो रमा, वो होता है प्यार।१०।

बुधवार, 25 जून 2014

"ग़ज़ल-काठ की हाँडी चढ़ेगी कब तलक" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक')

जिन्दगी आगे बढ़ेगी कब तलक
काठ की हाँडी चढ़ेगी कब तलक

लहर आयेगी बहा ले जायेगी सब
रेत में मूरत गढ़ेगी कब तलक

प्यार के सब रास्ते अवरुद्ध हैं
दोष अपने सर मढ़ेगी कब तलक

उस ओर गहरी खाई है चट्टान के
इस इबारत को पढ़ेगी कब तलक

खूबसूरत “रूप” पर सब हैं फिदा
जंग अस्मत की लड़ेगी कब तलक

मंगलवार, 24 जून 2014

"छोटों को सम्बल दिया, लिया बड़ों से ज्ञान" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक')

जिनके तन में विष है भरा, होठों पर हरि नाम।
मित्रों! ऐसे लोग ही, जपते केवल राम।।
--
पाँच साल से अधिक में, आये कितने मोड़।
लेकिन अन्तरजाल को, नहीं गया मैं छोड़।।
--
छोटों को सम्बल दिया, लिया बड़ों से ज्ञान।
जीवनभर मैंने किया, हिन्दी का उत्थान।।
--
जो अपने व्यवहार से, करते सीधी चोट।
सोने में गिनवा रहे, अब वो कितने खोट।।
--
मन में छल की गाँठ ले, चाह रहे हैं नाम।
ऐसे क्या हो पायेगा, उनका यहाँ निजाम।।
--
नित्य प्रकाशित कर रहा, उच्चारण का अंक।
औरों के हित के लिए, घिसता कलम मयंक।। 
 
आप सब मित्रों का हृदय से आभार।
आज मुझे पता लगा कि आभासी दुनिया के लोग 
मुझे कितना प्यार व सम्मान देते हैं।
मैं तो हिन्दी ब्लॉगिंग को समर्पित हूँ।
मैंने अव तर 30 से अधिक लोगों के ब्लॉग बनाये हैं और
50 से अधिक लोगों के ब्लॉगों के हैडर डिजाइन कर चुका हूँ।
Neeraj Kumar has left a new comment on your post ""आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक...": 

ब्लॉग या ब्लोगिंग बंद कर देना सही नहीं होगा शास्त्रीजी। ऐसी घटनाएँ होती रहती हैं और ऑनलाइन मीडिया पर यह प्रसारित त्वरित गति से होती है। इस तरह तो आप बहुतों को हतोत्साहित करेंगे और उनलोगों को प्रोत्साहित।

आग्रह है अपने अनुभवों से अपने चाहने वालो और अनुयायियों का मार्गदर्शन कराते रहेंगे और इसे भी एक अनुभव ही माने।
आग्रह है अपने फैसले पे पुनर्विचार करेंगे। 


कनिष्क कश्यप has left a new comment on your post ""आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक...": 

आदरणीय शास्त्री जी 
हिंदी ब्लॉग लेखन में आपका योगदान अतुलनीय है. आपने जिस तन्मयता के साथ लगातार ब्लॉग लेखन कर हिंदी को समृद्ध किया है, उससे आपका कद किसी भी तरह के तुच्छ विवादों से प्रभावित नहीं होता. वैसे भी एग्रीगेटर्स को आपकी जरूओरत है .. आपको किसी भी एग्रीगेटर की आवश्यकता मुझे नहीं जान पड़ती. केवल को आपसे सार्वजनिक रूप से माफी मंगनी चाहिए. 

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ has left a new comment on your post ""आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक...": 

आदरणीय शास्त्री जी आप कुछ ज़्यादा ही हताश और निराश दिख रहे हैं... हम आपके साथ हैं.... आप भी ऐसी बचकानी बातों को दिल पर ले लेते हैं... और आप भी सीधे-सादे ऐसी नामाकूल बातों में आ जाते हैं! यह क्या बात हुई कि ब्लॉगिंग बन्द... परेशान हों आपके दुश्मन आपको परेशान होने की ज़ुरूरत नहीं... एक नई ऊर्जा और स्फूर्ति के साथ आइए ब्लॉगिंग में हां नहीं तो! 


Ashok Saluja has left a new comment on your post ""आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक...": 

शास्त्री जी ये सब बड़ा दुखद है...इसका हल मिलजुल के हल करें। जो सब के लिए सुखद हो।
शुभकामनाये । 


vandana gupta has left a new comment on your post ""आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक...": 

क्या बात हो गयी आप क्यों बंद कर रहे हैं आपने नहीं जुडना वहाँ तो मत जुडिये मैने भी अब तक नहीं जोडा है कितनी बार कहा है केवलराम ने अब ये जरूरी थोडे है कि हम सभी जगह जुडेँ मगर दूसरे के लिए अपना काम थोडे छोड देंगे ।


आशीष भाई has left a new comment on your post ""आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक...": 

सबकी बात से मैं भी सहमत हूँ , आदरणीय शास्त्री जी के कारण ही आज कुछ हद तक हिंदी ब्लागिंग सुधरी हैं , इनका होना हमारे लिए बहुत हैं ! धन्यवाद !
I.A.S.I.H - ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ ) 


Mukesh Kumar Sinha has left a new comment on your post ""आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक...": 

मुझे लगता है शास्त्री सर आपने पूरी बात बताई नहीं ........ केवल को खुद आकर बताना चाहिए आखिर बात क्या हुई ........... 
वैसे आप सम्मानित हैं, ब्लॉगिंग के स्तम्भ हैं, ऐसा कोई कदम न उठाएँ !!

शुभकामनायें !! 


सुशील कुमार जोशी has left a new comment on your post ""आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक...": 

पुन: विचार करें । आप ब्लागिंग अपने लिये ही नहीं ब्लाग जगत के लिये कर रहे हैं । आपसे अनुरोध है ऐसा ना करें । HARSHVARDHAN has left a new comment on your post ""आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक...": 


शास्त्री सर जी,,,,

जब तक दोनों पक्ष अपनी बात नहीं रखते है, तब तक इस विषय पर किसी प्रकार की टिप्पणी निर्थक ही रहेगी। सादर 


अगर आप सही है तो, आप अपनी बात पर डटे रहे। क्योंकि सच एक ना एक दिन तो सबके सामने आ ही जाएगा। सादर।। 

Digamber Naswa has left a new comment on your post ""आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक...": 

आप ब्लोगिंग के शीर्ष लोगों से एक हैं ... ऐसी धमकियों से डरने वाली कोई बात नहीं है ...
आपका मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ी की लिए जरूरी है ... ब्लोगिंग जारी रक्खें ऐसा मेरा आग्रह है ... 

vibha rani Shrivastava has left a new comment on your post ""आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक...": 

आप से हमे थाती मिल रही है ...... आप हमारे आदरणीय हैं .... आप से अनुरोध है आप ऐसा ना करें .... रविकर ने आपकी पोस्ट " "आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है: 

अपने माता-पिता की, देखभाल अविराम । 
ब्लॉग-जगत की कर रहे, गुरु चर्चा निष्काम । 
गुरु चर्चा निष्काम, राम-केवल धमकाया । 
सेत-मेत में सेतु, ब्लॉग ने जहर पिलाया । 
दुष्ट सिद्ध कर हेतु, लगे जब ज्यादा तपने । 
रविकर होते स्वयं, तीर से घायल अपने ॥ 


आदरणीय शास्त्री जी ! आपके साथ जो भी घटित हुआ, वह सब बहुद अफ़सोसनाक है। कई बार ग़लतफ़हमी या ग़लत व्यवहार के चलते अप्रिय परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं। बड़ी समझदारी से इन्हें हल करना चाहिए। इनसे बड़ी परिस्थितियों को आपने पहले हल किया भी है। दूसरे व्यक्ति के व्यवहार का असर हमारे सृजन को बंद नहीं कर सकता।
हमारे साथ चंद ब्लॉगर्स ने जो कुछ किया है, वह सब आपके सामने है। हम अपना कर्म अनवरत करते रहे और आज भी कर रहे हैं। हम जो कुछ कर रहे हैं वह एक मालिक के अनुग्रह के लिए और सब मानवों के हितार्थ कर रहे हैं। किसी का विरोध या किसी के हौसला तोड़ने वाले वाक्य हमारे पवित्र कर्म को बाधित करने का कोई पर्याप्त कारण कभी नहीं हो सकते, आपके लिए भी यह कारण ब्लॉगिंग छोड़ने के लिए उचित और पर्याप्त नहीं है।
ऐसा लगता है कि आप किन्हीं कारणों से आजकल ज़्यादा संवेदनशील हो गए हैं। आप एक कवि हैं और बच्चों के लिए लिखने वाले बहुत कम कवियों में से एक हैं। बड़े की ग़लती बच्चों को अपने साहित्य से वंचित करके देना न्याय नहीं है।
आप अपनी जगह बरक़रार और क़ायम रहेंगे, ऐसी आशा है।
शुभकामनाएं!

आशीष भाई ने आपकी पोस्ट " "आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है: 

सर मुझसे भी ब्लॉग सेतु से अपने ब्लॉग को जोड़ने की बात कहीं गयी थी , लेकिन पासवर्ड की वजह के कारण मुझे भी पीछे रहना पड़ा मतलब मैंने भी ब्लॉग सेतु से अपना ब्लॉग नहीं जोड़ा , बल्कि इसके लिए मुझे भी टिप्पणी की गयी थी ! आदरणीय इन छोटी मोटी बातों पर गुस्सा नहीं हुआ करते , क्योंकि नाराजगी में आप ब्लॉगिंग छोड़ दोगे तो हम जैसो का साथ कौन देगा , ये समझ लीजिए की आपका होना ही हमारे लिए बहुत हैं ! धन्यवाद !
॥ जय श्री हरि: ॥ 

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने आपकी पोस्ट " "आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है: 

आदरणीय शास्त्री जी आप कुछ ज़्यादा ही हताश और निराश दिख रहे हैं... हम आपके साथ हैं.... आप भी ऐसी बचकानी बातों को दिल पर ले लेते हैं... और आप भी सीधे-सादे ऐसी नामाकूल बातों में आ जाते हैं! यह क्या बात हुई कि ब्लॉगिंग बन्द... परेशान हों आपके दुश्मन आपको परेशान होने की ज़ुरूरत नहीं... एक नई ऊर्जा और स्फूर्ति के साथ आइए ब्लॉगिंग में हां नहीं तो! 

Rangraj Iyengar ने आपकी पोस्ट " "आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है: 

सर जी ,
यह एक ब्लॉग पोस्ट है या सचाई का बखान. अजीबोगरीब लग रहा है. 
खेवलराम ची काल्पनिक हैं या विराजमान...कुछ साफ नहीं है...
एक बात और आप ब्ल़ग सेतु के लिए बल्ॉगिंग बंद कर रहे हैं या पूरी तरह से..
सब कुछ असमंजस में डालनेवाला है...
अयंगर. 

Kailash Sharma has left a new comment on your post ""आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक...": 

आपका ब्लॉगिंग छोड़ना निश्चय ही दुखद होगा...अपने निर्णय पर कृपया पुनर्विचार करें... 

सु..मन(Suman Kapoor) ने आपकी पोस्ट " "आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है: 

नमस्ते शास्त्री जी 
आप pls ऐसा मत करें ।bloging में आपका योगदान हमेशा हम सबके लिए प्रेरणादायक रहा है ।bloging मत छोड़िये ।आपसे निवेदन है । किसी और के लिए क्यूँ खुद को आहत कर रहे हैं । 

कमल कुमार सिंह (नारद ) has left a new comment on your post ""आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक...": 

शास्त्री जी , हिंदी ब्लोगिंग में जो भी हु उसमे आपकी बड़ी कृपा रही है, आपने ही सबसे पहले मुझे मंच प्रदान किया और संचालक बनाया था, इस नाते आग्रह करता हु की आप ब्लोगिंग न छोड़े, बाकी जो धमकी दे रहे हैं उनको देख लिया जाएगा. बहुत सारे "बड़े वालो " को देखा है, एक और सही . 


पूरण खण्डेलवाल has left a new comment on your post ""आज से ब्लॉगिंग बन्द" (डॉ. रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक...": 

आदरणीय शास्त्री जी , आप मेरे जैसे लोगों के पथप्रदर्शक और प्रेरणास्रोत हैं ! आप इस तरह से ब्लोगिंग से विदा लेंगे तो यह मेरे जैसे लोगों के लिए बहुत दुखद: है ! किसी द्वारा किये गए अन्याय का प्रतिकार कीजिये लेकिन इस तरह से मैदान छोड़ना अच्छा नहीं माना जाएगा ! में आपसे सादर प्रार्थना करता हूँ कि इस तरह से ब्लोगिंग को अलविदा मत कहिये !! 

शास्त्री जी
ब्लॉग जगत में सबके अपने अपने योगदान हैं और कोई अगर ब्लॉगिंग करने आया है तो अपनी मर्जी से आया है
अब किसी के कारन ब्लॉग छोड़ने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता
पर इस तरह की बातें करना और एक पक्षीय पोस्ट लिखना किसी भी तरह से सही नहीं है
दूसरा
कारण *
यह कि ब्लॉग सेतु के विषय में जो भी आपने कहा है वह ठीक नहीं है
आपने ब्लॉग सेतु को भेदभाव पूर्ण एग्रीगेटर बताया था
लेकिन उसका कोई प्रमाण नहीं दिया आपने
http://loksangharsha.blogspot.com/2014/06/blog-post_8.html

संजय भास्कर जी।

इससे बड़ा प्रमाण क्या होगा कि किसी ब्लॉगर के एक ब्लॉग को जोड़ लिया जाये और दूसरे पर अपत्ति की जाये। यह पक्षपात और ईष्या नहीं है तो क्या है।
जबकि चर्चा मंच एक ब्लॉग है एग्रीगेटर नहीं है और उस पर बिना किसी भेदभाव के सबकी अद्यतन पोस्टों के लिंक लगाये जाते हैं।
संजय भास्कर जी।
आप ही बताये कि आपकी पोस्टों के लिंक चर्चा मंच पर लिए जाते हैं या नहीं।

आदरणीय शास्त्रीजी, घटनाक्रम पढ़कर दुखी हुआ। आपसे एक ही अनुरोध है कि गूगल के भरोसे ब्लागिंग करके जीप्लस और ट्विटर, फेसबुक पर डालते रहिए। आपके लेखन से ब्लाग जगत के पाठकों को वंचित नहीं होना चाहिए।
धन्यवाद मित्रों।

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