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प्रकृति का मनोरम वर्णन ....
जवाब देंहटाएंबडा ही मनोरम चित्रण किया है………………मज़ा आ गया।
जवाब देंहटाएंबहुत ही बढिया .. वर्षऋतु का सटीक वर्णन !!
जवाब देंहटाएंआज तो हमारे यहाँ भी आये थे बादल और बरस के भी गए है ! मजा आ गया आज तो, आभार इस सुन्दर रचना के लिए !
जवाब देंहटाएंबादल बरस गये हैं, रस आपने दे दिया।
जवाब देंहटाएंtaaza ehsaas!
जवाब देंहटाएंati manbhaavan............
जवाब देंहटाएंsukhad....suhaavan
बहुत सुंदर जी , हमारे यहां भी कल से बरसात हो रही है.
जवाब देंहटाएंबेहद पसंद आई।
जवाब देंहटाएंमनोरम दृश्य बताता सुन्दर गीत
जवाब देंहटाएंप्रकृती के नजदीक ले जाती रचना |चित्र बहुत सुन्दर हैं बधाई |
जवाब देंहटाएंआशा
आपके इलाके में तो पानी गिर रहा है
जवाब देंहटाएंलेकिन इधर छत्तीसगढ़ में बारिश ठीक नहीं हो रही
रचना पढ़कर मन भींगने को कर रहा है
Sir .. Aapki kavita bahut achhi lagi.
जवाब देंहटाएंsaral sabdon ka prayog kiya hai..isliye aur bhi achhi lagi.
हमारे यहाँ तो बादल लगता है रूठ गये हैं इस कविता को मैं प्रार्थना के रूप में पढ़ रहा हूँ ।
जवाब देंहटाएंप्रकृति का मनोरम वर्णन ,बहुत ही बढिया .
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर।
जवाब देंहटाएंआज तो लखनऊ में भी बरस रहे हैं।
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नाग बाबा का कारनामा।
महिला खिलाड़ियों का ही क्यों होता है लिंग परीक्षण?
मनोरम काव्य -सृजन ....आभार..
जवाब देंहटाएंआज तो यहाँ भी घिर आये बादल.
जवाब देंहटाएंनन्ही नन्ही बूंदे लाये बादल
सुबह से शाम...
शाम से रात ..
सब को खूब
नहलाए सावन.