चरण-कमल वो धन्य हैं, समाज को जो दें दिशा, वे चाँद-तारे धन्य हैं, हरें जो कालिमा निशा, प्रसून ये महान हैं, प्रकृति है सँवारती। सराहनीय शूद्र हैं, पुकारती है भारती।। जो चल रहें हैं, रात-दिन, वो चेतना के दूत है, समाज जिनसे है टिका, वे राष्ट्र के सपूत है, विकास के ये दीप हैं, मही इन्हें दुलारती। सराहनीय शूद्र हैं, पुकारती है भारती।। जो राम का चरित लिखें, वो राम के अनन्य हैं, जो जानकी को शरण दें, वो वाल्मीकि धन्य हैं, ये वन्दनीय हैं सदा, उतारो इनकी आरती। सराहनीय शूद्र हैं, पुकारती है भारती।। |
| "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। मित्रों! आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। |

सराहनीय कविता।
जवाब देंहटाएंबिल्कुल सही कहा है आपने... मुझे इस बात से बड़ी तकलीफ होती है यदि कोई जन्म के आधार पर भेदभाव करता है. कोई भी.
जवाब देंहटाएंbahut sundar rachna.. bahut acchi baat kehti..seekh deti..
जवाब देंहटाएंबाऊ जी,
जवाब देंहटाएंनमस्ते!
आपकी कविता अच्छी लगी. जन्म-जाति-धर्म के अधर पर भेदभाव नहीं होना चाहिए.
इस सन्दर्भ में मेरे चिट्ठे पर प्रायश्चित पढ़ें. उम्मीद है आपको भायेगा.
आशीष
--
नौकरी इज़ नौकरी!
क्षमा करें, अधर को आधार पढ़ा जाये.
जवाब देंहटाएंआशीष
--
नौकरी इज़ नौकरी!
समाज को जो दें दिशा,
जवाब देंहटाएंवे चाँद-तारे धन्य हैं!
wah wah wah!!
wah....bahut badhiya kavita.aabhaar.
जवाब देंहटाएंwah.behad sunder bhaw.
जवाब देंहटाएंचरण-कमल वो धन्य हैं,
जवाब देंहटाएंसमाज को जो दें दिशा,
वे चाँद-तारे धन्य हैं,
हरें जो कालिमा निशा
बहुत सुन्दर गीत ...
हमेशा की तरह सुन्दर और लाजवाब रचना!
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर शब्द चित्रण्……………आज की समस्या को भी बखूबी चित्रित किया है।
जवाब देंहटाएंजो चल रहें हैं, रात-दिन,
जवाब देंहटाएंवो चेतना के दूत है,
समाज जिनसे है टिका,
वे राष्ट्र के सपूत है,
विकास के ये दीप हैं, मही इन्हें दुलारती।
सराहनीय शूद्र हैं, पुकारती है भारती।।
सुन्दर सार्थक अभिव्यक्ति!