सास-ससुर की छाती पर, बैठा रहता जामाता है।। खाता भी, गुर्राता भी है, सुनता नही सुनाता है। बेटी को दुख देता है तो, सीना फटता जाता है।। चंचल अविरल घूम रहा है , ठहर नही ये पाता है। धूर्त भले हो किन्तु मुझे, दामाद बहुत ही भाता है।। |
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damad ki nai paribhasha kya bat hai
जवाब देंहटाएंबहुत भयंकर जीव है इस युग का दामाद..
जवाब देंहटाएंधन्य हों आप, हमारे ससुराल को भी यही ज्ञान दे दें।
जवाब देंहटाएंवाह! ऐसा ससुर सबको मिले।
जवाब देंहटाएंनमन आपको।
damad ka bahut rochak chitran kiya hai.. umda !
जवाब देंहटाएंshastri ji -swaym ka damad hona bhata hai ya apna damad bhata hai ? ye baat samajh me na aate huye bhi kavita achchhi lagi .
जवाब देंहटाएंआपने बहुत दुखद बात कही है और यह तब जब आज ही मेरा दामाद मेरी लैपटॉप में मेरी आवश्यकता क सॉफ़्टवैयर भरकर लाया है.सुबह से मुझे सिखाने में लगा है.सप्ताह भर से दोनों दामाद मेरी आवश्यकता की हर वस्तु जैसे माउस लैपटॉप स्टैन्ड और न जाने क्या क्या खरीद रहे थे. न जाने कितने गीत व सिनेमा चुन चुनकर दोनों ने भरे हैं.सुबह विमान पकड़ने के लिए साढ़े तीन बजे का उठा वह मेरी एक एक समस्या का समाधान कर रहा है। मुझ जैसी भुलक्कड़ को हरेक बात लिखवा रहा है।
जवाब देंहटाएंअच्छे बुरे लोग ही अच्छे बुरे दामाद या ससुर बनते हैं.
हाँ दामाद का जो पारम्पारिक रूप हमने बनाया है वह अवश्य बुरा है.
घुघूती बासूती
मजा यह कि इस लैपटॉप पर यह पोस्ट पहली ही खोली थी और उसे भी पढ़वाई।
जवाब देंहटाएंघुघूती बासूती
कुछ कुछ खट्टी कुछ कुछ मीठी :)
जवाब देंहटाएंतभी दामाद को 10वां ग्रह कहा गया है……………बेहद खूबसूरत प्रस्तुति।
जवाब देंहटाएंमयंक जी, आपकी लेखनी का सचमुच जवाब नहीं।
जवाब देंहटाएं---------
ईश्वर ने दुनिया कैसे बनाई?
उन्होंने मुझे तंत्र-मंत्र के द्वारा हज़ार बार मारा।
बहुत खूब..इससे ज्यादा क्या कहें.
जवाब देंहटाएंchatpati rachna
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छी ओर रोचक लगी यह कविता....
जवाब देंहटाएंअच्छी ओर रोचक लगी यह कविता
जवाब देंहटाएं:) :)...अब मैं क्या कहूँ ? जिसने लिखी है वो भी तो दामाद होंगे न किसी के ...
जवाब देंहटाएंमुझे तो दामाद का घुघूती बासूती जैसा अनुभव है ...
aapki yeh haasya rachna bahut achchi lagi...achcha hua aaj hi padhi..kal hi mera damaad vapas gaya hai...ha ha ha..
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