गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021

गीत "आँसू यही बताते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

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दुख आने पर नयन बावरे,
खारा जल बरसाते हैं।
हमें न सागर से कम समझो,
आँसू यही बताते हैं।।
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हार नहीं जो कभी मानता,
पसरे झंझावातों से,
लेकिन हुआ पराजित मनवा,
अपनों की कटु बातों से,
चोट अगर दिल पर लगती,
तो आँसू को ढरकाते हैं।
हमें न सागर से कम समझो,
आँसू यही बताते हैं।।
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सुमन हमेशा काँटों के,
सँग-साथ खिला करता है,
अमृत के ही साथ सिन्धु में,
गरल मिला करता है,
दुख में भरी वेदना कितनी,
आँसू सब कह जाते हैं।
हमें न सागर से कम समझो,
आँसू यही बताते हैं।।
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ज्वार और भाटा जीवन के,
साथ चला करते हैं,
नकली कागज के प्रसून,
हर बार छला करते हैं,
आपा-धापी की महफिल में,
झूठा जश्न मनाते हैं।
हमें न सागर से कम समझो,
आँसू यही बताते हैं।।
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कभी-कभी दिनकर भी,
कुछ शीतलता दे जाता है,
लेकिन शीतल चन्दा भी तो,
दिल में आग लगाता है।
सुखद सलोने सपने मन में,
झूठी आस बँधाते हैं।
हमें न सागर से कम समझो,
आँसू यही बताते हैं।।

12 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 26-02-2021) को
    "कली कुसुम की बांध कलंगी रंग कसुमल भर लाई है" (चर्चा अंक- 3989)
    पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद.


    "मीना भारद्वाज"

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  2. --
    ज्वार और भाटा जीवन के,
    साथ चला करते हैं,
    नकली कागज के प्रसून,
    हर बार छला करते हैं,
    आपा-धापी की महफिल में,
    झूठा जश्न मनाते हैं।
    हमें न सागर से कम समझो,
    आँसू यही बताते हैं।।..सुन्दर मर्मस्पर्शी भावों की अभिव्यक्ति..

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  3. आंसू बहुत कुछ कहते हैं..आपकी रचना ने आंसू के हर मर्म को उजागर कर दिया है..बहुत सुंदर

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  4. आँसू सब कुछ कह देते हैं मन की बात ।
    सुंदर गीत ।

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  5. दुख में भरी वेदना कितनी,
    आँसू सब कह जाते हैं।
    हमें न सागर से कम समझो,
    आँसू यही बताते हैं।।

    आंसू के मर्म को कितनी गहराई से महसूस किया है आपने आदरणीय ! ... और फिर उसे सरस गीत में ढाला है...
    साधुवाद 🙏
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

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  6. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

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  7. दुख आने पर नयन बावरे,
    खारा जल बरसाते हैं।
    हमें न सागर से कम समझो,
    आँसू यही बताते हैं।।

    बहुत ही सुंदर,सार्थक संदेश देती रचना आदरणीय सर,सादर नमन आपको

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  8. हमें न सागर से कम समझो,
    आँसू यही बताते हैं।।आदरणीय सर कमाल की लेखनी और उसके भाव। मन को अनायास भा गई आपकी रचना। हार्दिक शुभकामनाएँ और प्रणाम 🙏🙏💐💐

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  9. बहुत सुंदर और सार्थक सृजन आदरणीय।

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  10. बहुत बढियां रचना, आंसूओं के हर मर्म को दर्शाती है

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