-- नया
साल जबसे आया है। साथ
बहुत सरदी लाया है।। -- शीतल
छाया, शीतल काया। नभ में
घना कुहासा छाया।। -- मैदानों
में धूप नहीं है। मौसम
भी अनुरूप नहीं है।। शीतल
पवन चल रहा सर-सर। चिंकू
काँप रहा है थर-थर।। -- मुन्ना
स्वाटर लेकर लाया। उसको
चिंकू को पहनाया।। -- चिंकू
ने आनन्द मनाया। -- |
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जवाब देंहटाएंजी नमस्ते ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरुवार(०६-०१ -२०२२ ) को
'लेखनी नि:सृत मुकुल सवेरे'(चर्चा अंक-४३०१) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर
बहुत सुंदर रचना।
जवाब देंहटाएंबहुत ही प्यारी प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंसुंदर सरस सहज बाल कविता बाल सुलभ।
जवाब देंहटाएंअप्रतिम।