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बहता जल
का सोता है
हाथ-हाथ
को धोता है
फूल कहाँ से पायेगा वो
जो
काँटों को बोता है
जिसके पास अधिक है होता
वही
अधिकतर रोता है
साथ समय के सब सम्भव है
क्यों
धीरज को खोता है
बीज खेत में नहीं बिखेरा
खेत सभी
ने जोता है
मुखिया अच्छा वो कहलाता
जो
रिश्तों को ढोता है
धूप “रूप” की ढल जाती तो
कठिन
बुढ़ापा होता है
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सुंदर ।
जवाब देंहटाएंbahut sundar bhav acchi gajal badhai chacha ji
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छी ग़ज़ल। हर शेर गौर करने योग्य।
जवाब देंहटाएंमेरी सोच मेरी मंजिल
gahri baat likhi hai aapne.... Har pankti saty ... Sunder saarthak prastuti !!
जवाब देंहटाएंमुखिया अच्छा वो कहलाता
जवाब देंहटाएंजो रिश्तों को ढोता है
सच्ची बात।