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नोट पाँच सौ के हुए, सभी पुराने बन्द।
नये नोट सरकार के, अब देंगे आनन्द।।
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मुद्रा एक हजार की, आज हुई इतिहास।
दो हजार के नोट अब, रखना अपने पास।।
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पापी पाकिस्तान का, पात्र गया है फूट।
उग्रवाद-आतंक की, कमर गयी है टूट।।
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सही समय पर हो गया, जारी यह फरमान।
मुद्रा का अब देश की, बढ़ जायेगा मान।।
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अपनी धन-दौलत करो, जमा बैंक में जाय।
है काले धन के लिए, बचा न और उपाय।।
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बच पायेंगे अब नहीं, जमाखोर-मक्कार।
कैसे धन अर्जित किया, देखेगी सरकार।।
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सही सलामत बच गये, लोकतन्त्र में आम।
लेकिन खासम-खास का, होगा काम तमाम।।
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आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 10.9.2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2522 में दिया जाएगा
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
बच पायेंगे अब नहीं, जमाखोर-मक्कार।
जवाब देंहटाएंकैसे धन अर्जित किया, देखेगी सरकार।।
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सही सलामत बच गये, लोकतन्त्र में आम।
लेकिन खासम-खास का, होगा काम तमाम।। ...जय हो
..बहुत सुन्दर ..
बहुत सुंदर...त्वरित..सामयिक
जवाब देंहटाएंbahut sundar dohe
जवाब देंहटाएंलेकिन खासम खास का होगा काम तमाम...... वाह, पर काम तमाम होते ही वे तो आम से भी गये गुजरे हो गये।
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