बड़े दिनों के बाद में, आयी है बरसात। उमड़-घुमड़कर श्यामघन, बरसे पूरी रात।। -- खेतों में पानी भरा, नाले हैं लबरेज। रोपाई का धान की, काम हो गया तेज।। -- बारिश से भीगा बदन, बहुत दिनों के बाद। अपनी नौका नदी में, लाये आज निषाद।। -- झरने झर-झर कर रहे, उफन रहे हैं ताल। सरिताओं का हो रहा, रूप आज विकराल।। -- बया नीड़ से झाँकती, गर्दभ करते गान। भारी बारिश से कहीं, दरक रही चट्टान।। -- रंग-बिरंगी छतरिया, ओढ़ रहे हैं लोग। सिर ढकने के है लिए, छातों का उपयोग।। -- बालक कागज की बना, चला रहे हैं नाव। जाती नौका उधर ही, होता जिधर बहाव।। -- बरस रहा है जोर से, सावन और आषाढ़। जो निचले भू-भाग हैं, उनमें आयी बाढ़।। -- फिर से सूखे चमन में, आने लगी बहार। सूखी पड़ी जमीन की, भरने लगीं दरार।। |
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वाह वाह वाह!सुंदर
जवाब देंहटाएंखूबसूरत दोहे...बरसात के...👏👏👏
जवाब देंहटाएंबरसात के अलग अलग परिणामों पर सटीक दोहे।
जवाब देंहटाएंवाह!बहुत सुंदर दोहे सर।
जवाब देंहटाएंसादर