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मंगलवार, 31 दिसंबर 2019

गीत "सम्बन्धों को जोड़ो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गीत "साल पुराना बीत रहा है" 
साल पुराना बीत रहा है, कल की बातें छोड़ो।

फिर से अपना आज सँवारो, सम्बन्धों को जोड़ो।।
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आओ दृढ़ संकल्प करें, गंगा को पावन करना है,
हिन्दी की बिन्दी को, माता के माथे पर धरना है,
जिनसे होता अहित देश का, उन अनुबन्धों को तोड़ो।
फिर से अपना आज सँवारो, सम्बन्धों को जोड़ो।।
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नये साल में पनप न पाये, उग्रवाद का कीड़ा,
जननी-जन्मभूमि की खातिर, आज उठाओ बीड़ा,
पथ से जो भी भटक गये हैं, उन लोगों को मोड़ो।
फिर से अपना आज सँवारो, सम्बन्धों को जोड़ो।।
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मानवता की बगिया में, इंसानी पौध उगाओ,
खुर्पी ले करके हाथों में, खरपतवार हटाओ,
रस्म-रिवाजों के थोथे, अब चाल-चलन को तोड़ो।
फिर से अपना आज सँवारो, सम्बन्धों को जोड़ो।।
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सोमवार, 30 दिसंबर 2019

दोहे "होंगे नये सुधार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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उग्रवाद-अलगाव का, किया सही उपचार।
अपने भारत पर किया, मोदी ने उपकार।।
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हारी कट्टरपन्थियाँ, जीत गई सरकार।।
दो हजार उन्नीस में, दिये कई उपहार।।
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साहस करके देश पर, किया बहुत उपकार।
जो दशकों की गल्तियाँ, उनको दिया सुधार।।
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जितनी मिली चुनौतियाँ, किया उन्हें स्वीकार।
सीमाओं को देश की, दिया पुनः आकार।।
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ताल ठोककर कह दिये, दिल के सब उदगार।
सारे जग में हो गयी, भारत की जयकार।।
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लोहा भारतवर्ष का, मान गया संसार।
दुनियाभर में पाक की, हुई करारी हार।।
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सेनाओं के पास में, हैं उन्नत हथियार।
सीमाओं पर फौज को, हैं सारे अधिकार।।
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आने वाले साल में, होंगे नये सुधार।
पापी पाकिस्तान के, टुकड़े होंगे चार।।
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रविवार, 29 दिसंबर 2019

गीत "कब चमकेंगें नभ में तारे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!
जनसेवक खाते हैं काजू,
महँगाई खाते बेचारे!!
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काँपे माता-काँपे बिटियाभरपेट न जिनको भोजन है,
क्या सरोकार उनको इससेक्या नूतन और पुरातन है,
सर्दी में फटे वसन फटे सारे!
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!
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जो इठलाते हैं दौलत परवो खूब मनाते नया-साल,
जो करते श्रम का शीलभंगवो खूब कमाते द्रव्य-माल,
भाषण में हैं कोरे नारे! 
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!
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नव-वर्ष हमेशा आता हैसुख के निर्झर अब तक न बहे,
सम्पदा न लेती अंगड़ाईकितने दारुण दुख-दर्द सहे,
मक्कारों के वारे-न्यारे! 
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!
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रोटी-रोजी के संकट मेंकुछ दूर देश में जाते हैं,
कहने को अपने सारे हैंपर झूठे रिश्ते-नाते हैं,
सब स्वप्न हो गये अंगारे!
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!
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टूटा तन-मन भी टूटा हैअभिलाषाएँ बस जिन्दा हैं,
आयेगीं जीवन में बहारयह सोच-सोच शरमिन्दा हैं,
कब चमकेंगें नभ में तारे! 
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!
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शनिवार, 28 दिसंबर 2019

गीत "गौरय्या का गाँव" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')



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सन्नाटा पसरा है अब तो,
गौरय्या के गाँव में।
दम घुटता है आज चमन की,
ठण्डी-ठण्डी छाँव में।।
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नहीं रहा अब समय सलोना,
बिखर गया ताना-बाना,
आगत का स्वागत-अभिनन्दन,
आज हो गया बेगाना,
कंकड़-काँटे चुभते अब तो,
पनिहारी के पाँव में।
दम घुटता है आज चमन की,
 ठण्डी-ठण्डी छाँव में।।
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परम्परा के गीत नहीं हैं,
अब अपने त्यौहारों में,
भुला दिये है देशी व्यञ्जन,
पूरब के आहारों में,
दबा सुरीला कोयल का सुर,
अब कागा की काँव में।
दम घुटता है आज चमन की,
 ठण्डी-ठण्डी छाँव में।।
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घास-फूँस के माटी के घर,
अब तो नजर नहीं आते,
खेत-बाग-वन आज घरा पर,
दिन-प्रतिदिन घटते जाते,
खोज रहे हैं शीतल छाया,
कंकरीट की ठाँव में।
दम घुटता है आज चमन की,
 ठण्डी-ठण्डी छाँव में।।
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शुक्रवार, 27 दिसंबर 2019

दोहे "परिवेश" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

परिवेश पर विविध दोहे
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उच्चारण सुधरा नहीं, बना नहीं परिवेश।
अँगरेजी के जाल में, जकड़ा सारा देश।१।
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अपना भारतवर्ष है, गाँधी जी का देश।
सत्य-अहिंसा के यहाँ, मिलते हैं सन्देश।२।
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लड़की लड़का सी दिखें, लड़के रखते केश।
पौरुष पुरुषों में नहीं, दूषित है परिवेश।३।
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भौतिकता की बाढ़ में, घिरा हुआ है देश।
फैशन की आँधी चली, बिगड़ गया है वेश।४।
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हरकत से नापाक की, बिगड़ रहा परिवेश।
सीमा पर घुसपैठ को, झेल रहा है देश।५।
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नहीं बड़ा है देश से, भाषा-धर्म-प्रदेश।
भेद-भाव की भावना, पैदा करती क्लेश।६।
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प्यार और सदभाव के, थोथे हैं सन्देश।
दाँव-पेंच के खेल में, चौपट हैं परिवेश।७।
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खुद जलकर जो कर रहा, आलोकित परिवेश।
नन्हा दीपक दे रहा, जीवन का सन्देश।८।
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सूफी-सन्तों ने दिया, दुनिया को उपदेश।
अपने प्यारे देश का, निर्मल हो परिवेश।९।
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रखना होगा अमन का, भारत में परिवेश।
मत-मजहब से है बड़ा, अपना प्यारा देश।१०।
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गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

दोहे "मानवता लाचार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')



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अब फैशन इस दौड़ में, मानवता लाचार।।
नहीं रही शालीनता, वस्त्र गये हैं हार।।
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उपवन में कलियाँ करें, जब-जब भी शृंगार।
उन्हें रिझाने के लिए, मधुप करें गुंजार।।
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कामुकता के मूल में, सुन्दरता के तार।
रूप-गन्ध के लोभ में, मधुप करें बेगार।।
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रूप-रंग को देखकर, मधुप हुआ लाचार।
असली सुमनों से करें, भँवरे नकली प्यार।।
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बदल गया है आज तो, यौवन का किरदार।
आवारा षटपद करें, जबरन यौनाचार।।
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बैरी पॉलीथीन की, घर-घर में भरमार।
गन्दे नालों सी हुई, सरिताओं की धार।।
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बुधवार, 25 दिसंबर 2019

दोहे "बाँटो कुछ उपहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जो मानवता के लिए, चढ़ता गया सलीब।
वो ही होता कौम का, सबसे बड़ा हबीब।।
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जिसमें होती वीरता, वही भेदता व्यूह।
चलता उसके साथ ही, जग में विज्ञ समूह।।
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मंजिल हो जिस राह में, उस पर चलते लोग।
पालन करता नियम जो, वो ही रहे निरोग।।
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जो जन सेवा के लिए, करता है पुरुषार्थ।
उसके सारे काम ही, कहलाते परमार्थ।।
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थोथी बातों से नहीं, कोई बने मसीह।
लालच में जपता सदा, ढोंगी ही तस्बीह।।
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जिसके दिल में हों भरे, ममता-समता-प्यार।
वो जनता के हृदय पर, कर लेता अघिकार।।
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दीन-दुखी-असहाय को, बाँटो कुछ उपहार। 
शिक्षा देता है यही, क्रिसमस का त्यौहार।
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मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

गीत "सेवा का पथ यीशू ने दिखलाया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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मानवता के लिए,
सलीबों को अपनाया।
लोहे की कीलों से,
अपना तन जिसने बिंधवाया।
आओ उस यीशू को,
हम प्रणाम करें!
उस बलिदानी का,
आओ गुणगान करें!!
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सेवा का पावन पथ,
जिसने दिखलाया।
जातिवाद के भेद-भाव से,
जिसने मुक्त कराया।
आओ उस यीशू को,
हम प्रणाम करें!
उस बलिदानी का,
आओ गुणगान करें!!
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घूम-घूम कर विद्यामन्दिर 
और चिकित्सालय खुलवाया।
भूले-भटके लोगों को
जिसने था गले लगाया।
आओ उस यीशू को,
हम प्रणाम करें!
उस बलिदानी का,
आओ गुणगान करें!!
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सोमवार, 23 दिसंबर 2019

गीत "सुधरेंगें बिगड़े हुए हाल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

चमकेगा फिर से गगन-भाल।
आने वाला है नया साल।।
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आशाएँ सरसेंगी मन में,
खुशियाँ बरसेंगी आँगन में,
सुधरेंगें बिगड़े हुए हाल।
आने वाला है नया साल।।
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होंगी सब दूर विफलताएँ,
आयेंगी नई सफलताएँ,
जन्मेंगे फिर से पाल-बाल।
आने वाला है नया साल।।
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सिक्कों में नहीं बिकेंगे मन,
सत्ता ढोयेंगे पावन जन,
अब नहीं चलेंगी कुटिल चाल।
आने वाला है नया साल।।
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हठयोगी, ईसाई-ग्रन्थी,
हिन्दू-मुस्लिम, कट्टरपन्थी,
अब नहीं बुनेंगे धर्म-जाल।
आने वाला है नया साल।।
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