"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

रविवार, 21 अप्रैल 2019

दोहे "गिरवीं रखा जमाल" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


बिना बुलाये क्यों गये, शासक पाकिस्तान।
पूछ रहा है प्रश्न ये, सारा हिन्दुस्तान।।

भुला दिया गौरव सभी, गिरवीं रखा जमाल।
हमदर्दी थी किसलिए, उससे दीनदयाल।।

गरज पड़ी थी कौन सी, गये पाक तत्काल।
भूल हुई है आपसे, करलो इस्तकबाल।।

असन्तुष्ट हैं लोग अब, जूते रहे उछाल।।
वैसा ही फल मिल रहा, जैसे किये कमाल।।

अच्छे दिन आये नहीं, करते सभी सवाल।
आज चुनावी दौर में, होता बहुत मलाल।।



शनिवार, 20 अप्रैल 2019

मुक्तकगीत "बैरियों को कब्र में दफन होना चाहिए" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

-१-
घण्टे-घड़ियालताल-खड़ताल लेके अब,
भारत माँ का कीर्तन-भजन होना चाहिए।
देश की सीमाओँ को बचाने के लिए तो आज,
तन-मन प्राण का हवन होना चाहिए।
-२-
शासकों को सीधी चाल चलने की जरूरत है,
तुष्टिकरण नीति का दमन होना चाहिए।
ईंट का जवाब अब देना होगा पत्थरों से,
बैरियों को कब्र में दफन होना चाहिए।
-३-
कोठी-बंगलों में ऐश बन्द होनी चाहिए,
सबके लिए मामूली भवन होना चाहिए।
रत्न-भूषण और श्री चाटुकारिता के चिह्न से,
मुक्त अपना प्यारा ये चमन होना चाहिए।
-४-
उग्रवादियों को सजा फाँसी की मिले तुरन्त,
अपने प्यारे देश में अमन होना चाहिए।
नेताओं की लाश को न झण्डे लपेटा जाये,
शहीदों का तिरंगा कफन होना चाहिए।
-५-
आजादी की जंग में जिन्होंने बलिदान दिया,
उन देशभक्तों का नमन होना चाहिए
जाति-धर्म, भाषा और भूषा की न होड़ लगे,
सबसे पहले अपना वतन होना चाहिए।

शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019

दोहे "बलशाली-हनुमान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ' मयंक')

हनुमान जयन्ती की
सभी भक्तों और पाठकों को 
बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।
धीर-वीर, रक्षक प्रबल, बलशाली-हनुमान।
जिनके हृदय-अलिन्द में, रचे-बसे श्रीराम।।
--
महासिन्धु को लाँघकर, नष्ट किये वन-बाग।
असुरों को आहत किया, लंका मे दी आग।।
--
कभी न टाला राम का, जिसने था आदेश।
सीता माता को दिया, रघुवर का सन्देश।।
--
लछिमन को शक्ति लगी, शोकाकुल थे राम।
पवन वेग की चाल से, पहुँचे पर्वत धाम।।
--
संजीवन के शैल को, उठा लिया तत्काल।
बूटी खा जीवित हुए, दशरथ जी के लाल।।
--
बिगड़े काम बनाइए, बनकर कृपा निधान।
कोटि-कोटि वन्दन तुम्हें, पवनपुत्र हनुमान।। 

गुरुवार, 18 अप्रैल 2019

दोहे "ईवीएम में बन्द" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हुआ दूसरे चरण का, जगह-जगह मतदान।
सब अपनी ही जीत का, लगा रहे अनुमान।।

किसको मिले विषाद अब, मिले किसे आनन्द।
क्या होगा परिणाम सब, ईवीएम में बन्द।।

आ जायेगा सामने, कुछ दिन में निष्कर्ष।
वही सफल होता यहाँ, जो करता संघर्ष।।

उगी हुई है खेत में, कितनी खरपतवार।
सभी यहाँ बीमार हैं, लेकिन एक अनार।।

नौका है मझधार में, कैसे होगी पार।
लिए सभी हैं नाव में, भाषण की पतवार।।

बुधवार, 17 अप्रैल 2019

विविध दोहे "धड़कन बिना शरीर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


बचा न कोई काल से, राजा-रंक फकीर।
मिट्टी का है लोथड़ा, धड़कन बिना शरीर।।

सच्चे जियें अभाव में, झूठे बनें वजीर।
दर-दर भटकें देश में, ज्ञानी सन्त कबीर।।

कोई धन का दास है, कोई यहाँ फकीर।
दुर्जन को नवनीत है, सज्जन को है नीर।।

होता अपने देश में, हर सैनिक प्रणवीर।
जिसमें रणकौशल छिपा, वो ही है रणधीर।।

सबकी किस्मत में नहीं, होता सुखद समीर।
होती हर सन्तान की, अलग-अलग तकदीर।।

हुए एक ही कोख से, दो बालक उत्पन्न।
कोई यहाँ विपन्न है, कोई है सम्पन्न।।

चमचों को हैं पालते, राजा और वजीर।
बँधे हुए हैं द्वार पर, चमचे बिन जंजीर।।

पड़ी हुई हैं पाँव में, मजहब की जंजीर।
पण्डित-मुल्ला-पादरी, करते हैं तकरीर।।

मंगलवार, 16 अप्रैल 2019

समीक्षा "कोशिश तीन मिसरी शायरी (तिरोहे)" (समीक्षक-डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

 
कोशिश
तीन मिसरी शायरी (तिरोहे)
     काफी दिनों से डॉ. सत्येन्द्र गुप्ता की तीन मिसरी शायरी (तिरोहे) की नई विधा पर प्रकाशित कृति “कोशिश” मेरे पास समीक्षा की कतार में थी। मगर समयाभाव के कारण समय नहीं निकाल पाया था। “कोशिश” के नाम से तीन मिसरी शायरी (तिरोहे) के बारे में मेरे लिए लिखना एक नया अनुभव और कठिन कार्य था।
     आयु में मुझसे लगभग 6 वर्ष बड़े डॉ. सत्येन्द्र गुप्ता मेरे जन्मस्थान नजीबाबाद के निवासी हैं लेकिन मुझे उनसे मिलने का कभी सौभाग्य नहीं प्राप्त हुआ है। अक्सर मैं आपकी ग़ज़लें और शायरी आपके ब्लॉग पर पढ़ा करता था और कुछ सुझाव भी दे दिया करता था। गत वर्ष 22 सितम्बर, 2018 को चेन्नई में इण्डियन वर्चुअल सोसायटी फॉर पीस एण्ड एजुकेशन, बैंगलौर द्वारा आपको तीन मिसरी सायरी तिरोहे के लिए हिन्दी साहित्य में मानद डॉक्टरेट की उपाधि से अलंकृत भी किया गया है। यह व्यक्तिगत मेरे लिए ही नहीं अपितु मेरे गृह नगर नजीबाबाद के लिए गौरव की बात है।
     “कोशिश” तिरोहे तीन मिसरी शायरी एक नई विधा को अविचल प्रकाशन हल्द्वानी (उत्तराखण्ड) बिजनौर (उत्तर प्रदेश) द्वारा प्रकाशित किया गया है। तिरोहे के इस संकलन में 160 पृष्ठ हैं और इसका मूल्य 250-00 रुपये है।
      शायर डॉ. सत्येन्द्र गुप्ता ने खुदा को हाजिर-नाजिर मान कर इस संकलन का शुभारम्भ करते हुए तीन मिसरी शायरी में लिखा है-
“उसकी शान में कुछ तो अता कर
हर चीज़ मिल जाती है दुआ से
माँगकर तो देख ले ख़ुदा से”
      कवियों/शायरों को नसीहत देते हुए तीन मिसरी शायरी में कवि कहता है-
“साहस है तो इबारत नई लिख
शब्दों के माने बदलते रहते हैं
रिवाज पुराने बदलते रहते हैं”
      कविता के बारे में कवि ने अपनी बात कुछ इस प्रकार से कही है-
“दिमाग से निकलकर आई पन्नों पर
धीरे-धीरे वक्त की नजर हो गई
पन्नों पर कविता अमर हो गई”
      मुहब्बत के बारे में कवि ने अपने ढंग से बहुत ही उम्दा बात कही है-
“हसरत बनकर रह गई मुहब्बत
शाम कूचा-ए-यार में गुजर गई
सुबह इश्किया खुमार में गुजर गई”
      इसी मिजाज का एक और तिरोहा भी देखिए-
“रोशनाई इश्क की सारी उड़ गई
खाली मगर दिल की दवात न हुई
मिलकर भी लगा मुलाकात ना हुई”
      कवि ने जिह्वा के बारे में अपने अलग अन्दाज में कुछ इस तरह से तिरोहा लिखा है-
“नश्तर से भी खरोंच नहीं लगी
इस जुबान का यार क्या करते
इतनी तेज तलवार यार क्या करते”
     इंटरनेट पर तंज करते हुए शायर ने लिखा है-
“कंचे, गिल्ली-डण्डे, पतँगें उड़ाना
वो खेलने के तौर पुराने हो गये
नैट के ही बच्चे दीवाने हो गये”
     फैशन का बढ़ता खुमार देखते हुए शायर लिखता है-
“टाइट जीन्स , टी शर्ट, मिनी स्कर्ट्स
दुनिया को बदले जमाने हो गये
हम तो जैसे कपड़े पुराने हो गये”
       बादल के बारे में कवि ने अपनी अलग परिभाषा करते हुए लिखा है-
“बादल के पास अपनी कुछ भी नहीं
समन्दर का गम लेकर बरसता है
उसके ही दर्द में पिघलता है”
      तीन मिसरी शायरी से ही एक तिरोहा और देखिए-
“हमें दोस्ती निभाते सदियाँ गुजर गईं
वो दोस्ती के दुखड़े सुनाने में लगे हैं
हम मुद्दत से रिश्ते निभाने में लगे हैं”
       “जो चलता जाता है उसको ही मंजिल मिलती है” बहुत समय से डॉ. सत्येन्द्र गुप्ता लिखने में मशगूल थे। फलस्वरूप आज उनके पास शायरी का बिपुल भण्डार है। आपकी अब तक दस पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकीं हैं। आशा करता हूँ कि भविष्य में आपकी और भी कृतियाँ पाठकों को पढ़ने को मिलेंगी। मैं आपके दीर्घ जीवन की कामना करता हूँ।
      साहित्य की विधाएँ साहित्यकार की देन होती हैं। जो समाज को दिशा प्रदान करती हैं, जीने का मकसद बताती हैं। सूर, कबीर, तुलसी, जायसी, नरोत्तमदास इत्यादि समस्त कगवियों ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज को कुछ न कुछ नया देने का प्रयास किया है। “कोशिश” तिरोहे तीन मिसरी शायरी भी एक नया प्रयोग है। जो डॉ. सत्येन्द्र गुप्ता की कलम से निकला है।
     मुझे आशा ही नहीं अपितु पूरा विश्वाश भी है कि आपकी तीन मिसरा शायरी पाठकों के दिल की गहराइयों तक जाकर अपनी जगह बनायेगी और समीक्षकों की दृष्टि में भी यह उपादेय सिद्ध होगी।
     हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-  
समीक्षक
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 
कवि एवं साहित्यकार
टनकपुर-रोड, खटीमा
जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड) 262308
मोबाइल-7906360576
Website. http://uchcharan.blogspot.com/ 
E-Mail . roopchandrashastri@gmail.com

सोमवार, 15 अप्रैल 2019

"गौरैया ने घर बनाया" (समीक्षक-डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

आसान नहीं है 
बाल साहित्य को रचना 
     कई दिनों पूर्व मुझे डाक से जय सिंह आशावत जी की बालकृति "गौरैया ने घर बनाया" प्राप्त हुई। जो मुझे बहुत अच्छी लगी और मुझे अपने उन दिनों की याद दिला गयी जब मेरे पौत्र-पौत्री छोटे थे और प्रतिदिन ही नये विषय पर नई कविता की माँग कर देते थे। उनकी माँग पूरा करते करते मैं भी बालकवि के रूप में प्रतिष्ठित हो गया था।
    विषयान्तर में न जाते हुए मैं यह कहना चाहता हूँ कि बाल कविता रचने के लिए बचपन में ही वापिस लौटना पड़ता है। बच्चों की मानसिकता को जानने-समझने के लिए खुद को बच्चा बनाना पड़ता है। भाई जय सिंह आशावत ने खुद को बच्चों के चरित्र में ढाला होगा तभी तो इतनी सुन्दर और बालोपयोगी कृति "गौरैया ने घर बनाया" को उन्होंने प्रकाशित करवाया है।
    पेपरबैक में छपी 76 पृष्ठों की इस पुस्तिका का प्रकाशन बोधि प्रकाशन, जयपुर से किया गया है जिसका मूल्य मात्र 100-00 रखा गया है। बालकों की अभिरुचियों को दृष्टिगत रखते हुए कवि ने प्रत्येक रचना के साथ उससे सम्बन्धित रेखाचित्र को भी लगाया है। जिसके कारण इस कृति की उपयोगिता और लोकप्रियता और भी बढ़ गयी है।
     कवि ने “भारत माता” शीर्षक से एक उपयोगी बालगीत से अपनी बालकृति गौरैया ने घर बनाया का श्रीगणेश किया है। जिसकी पंक्तियाँ बहुत ही हृदयग्राही हैं-
“भारतमाता।
भाग्य विधाता।
शत-शत नमन
और वन्दन।
जगद्गुरू के सिंहासन पर
माँ विराजकर।
जग का सारा कलुष मिटा दे
अन्धकार हर।
माँ मेटो तपस-तपन
शत-शत नमन और वन्दन।“
       कवि ने नव वर्ष का स्वागत करते हुए लिखा है-
सुस्वागत नववर्ष का।
मौसम आया हर्ष का।
भैया चुप क्यों बैठे हो
प्रयत्न करो उत्कर्ष का।“
     इस बालकृति का तीसरा बालगीत “गौरैया ने घर बनाया” शीर्षक गीत है जो बहुत ही हृदयग्राही बन पड़ा है-
“गौरैया ने घर बनाया, तिनका-तिनका जोड़कर।
बड़े हुए तो फुर से उड़ गये, बच्चे ममता छोड़कर।

हाथी दादा जब सर्कस में
ऊँची सूँड उठाए।
सब को झुक-झुक करे नमस्ते,
तुमको कितना भाए।
ऐ भैया जी करो नमस्ते
दोनों हाथ जोड़कर।
“गौरैया ने घर बनाया, तिनका-तिनका जोड़कर।“
      बच्चों को रंग-बिरंगी तितलियाँ बहुत लुभाती हैं। मैंने आज तक जितनी भी बालकृतियों की समीक्षा की है उन सबमें तितली की कविता को जरूर पाया है, इस कृति में भी कवि ने तितली शीर्षक से एक बाल गीत का समावेश किया है-
“कितनी रंग-बिरंगी तितली
कुछ छोटी कुछ मोटी तितली
लाल गुलाबी नीली पीली
काली और चितकबरी तितली

बच्चो सी इठलाती तितली
फूलों पर मँडलाती तितली
रोज बोर में खिले फूल जब
मधु पराग ही खाती तितली”
      हैलमेट दुपहिया वाहन के लिए बहुत जरूरी और उपयोगी होता है। कवि ने "हेलमेट" पर अपनी कलम चलातो हुए एक बाल कविता को अपनी कृति में स्थान दिया है-
“हैलमेट के बिना दुपहिया।
नहीं चलाना मेरे भैया।

भाभी को पीछे बैठाना।
लेकिन हेलमेट लगवाना।“
     यद्यपि उल्लू आजकल बहुत कम दिखाई देते हैं लेकिन बच्चों को किताबों और इंटरनेट पर चित्रों में बहुतायत से दिखाई दे जाते हैं और बच्चों को बहुत अच्छे लगते हैं। कवि ने भी "उल्लू" पर अपनी बाल कविता को इस बाल संकलन स्थान दिया है देखिए-
“उल्लू को दिखता ही रात में
दिन तो गुजारे सोकर।
घुप्पु-घुप्पु बोल भयंकर
रहे पेड़ के खोखर।“
     कवि जय सिंह आशावत ने अपनी बालकृति “गौरैया ने घर बनाया” में सपेरा, आम-अनार-अंगूर, सुहानी भेर, नाचे मोर, हाथी, चन्दा, मेंढक, रेल, नीम, कुकुरमुत्ता, कुल्फी आदि विषयों पर सफलतापूर्वक कलम चलाकर सुन्दर बालगीतों और बालकविताओं स्थान दिया है।
      मुझे आशा अपितु विश्वास भी है कि आपकी यह बालकृति बच्चों को ही नहीं अपितु प्रौढ़ पाठकों को भी पसन्द आयेगी। साथ ही यह भी आशा करता हूँ कि “गौरैया ने घर बनाया” नामक आपकी बालकृति समीक्षकों के दृष्टिकोण से भी उपादेय सिद्ध होगी।
      मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ और कामना करता हूँ कि भविष्य आपकी अन्य कृतिया भी प्रकाशित होंगी और पाठकों को पढ़ने को मिलेंगी।

समीक्षक
(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक’)
कवि एवं साहित्यकार
टनकपुर-रोड, खटीमा
जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड) 262 308
E-Mail . roopchandrashastri@gmail.com
Website. http://uchcharan.blogspot.com/
मोबाइल-7906360576

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails