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शनिवार, 25 अक्टूबर 2014

"भइयादूज पर्व-दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


यज्ञ-हवन करके बहन, माँग रही वरदान।
भइया का यमदेवता, करना शुभ-कल्याण।।
--
भाई बहन के प्यार का, भइया-दोयज पर्व।
अपने-अपने भाई पर, हर बहना को गर्व।।
--
तिलक दूज का कर रहीं, सारी बहनें आज।
सभी भाइयों के बने, सारे बिगड़े काज।।
--
रोली-अक्षत-पुष्प का, पूजा का ले थाल।
बहन आरती कर रही, मंगल दीपक बाल।।
--
एक बरस में एक दिन, आता ये त्यौहार।
अपनी रक्षा का बहन, माँग रही उपहार।।
--
जब तक सूरज-चन्द्रमा, तब तक जीवित प्यार।
दौलत से मत तोलना, पावन प्यार-दुलार।।

शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2014

"गीत-भइयादूज" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आज भइयादूज के पावन अवसर पर 
एक पुराना गीत

मेरे भइया तुम्हारी हो लम्बी उमर,
 कर रही हूँ प्रभू से यही कामना।
लग जाये किसी की न तुमको नजर,
दूज के इस तिलक में यही भावना।।
चन्द्रमा की कला की तरह तुम बढ़ो,
उन्नति के शिखर पर हमेशा चढ़ो,
कष्ट और क्लेश से हो नही सामना।
दूज के इस तिलक में यही भावना।।

थालियाँ रोली चन्दन की सजती रहें,

सुख की शहनाइयाँ रोज बजती रहें,
 हों सफल भाइयों की सभी साधना।
दूज के इस तिलक में यही भावना।। 
रोशनी से भरे दीप जलते रहें,
नेह के सिन्धु नयनों में पलते रहें,
आज बहनों की हैं ये ही आराधना।
दूज के इस तिलक में यही भावना।।

"दोहे-गोवर्धन पूजा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अन्नकूट (गोवर्धनपूजा)
अन्नकूट पूजा करो, गोवर्धन है आज।
गोरक्षा से सबल हो, पूरा देश समाज।१।
श्रीकृष्ण ने कर दिया, माँ का ऊँचा भाल।
सेवा करके गाय की, कहलाये गोपाल।२।
गौमाता से ही मिले, दूध-दही, नवनीत।
सबको होनी चाहिए, गौमाता से प्रीत।३।
गइया के घी-दूध से, बढ़ जाता है ज्ञान।
दुग्धपान करके बने, नौनिहाल बलवान।४।
कैमीकल का उर्वरक, कर देगा बरबाद।
फसलों में डालो सदा, गोबर की ही खाद।५।

गुरुवार, 23 अक्टूबर 2014

"खूबसूरत लग रहे नन्हें दिये" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

!! शुभ-दीपावली !!
तम अमावस का मिटाने को दिवाली आ गयी है।
दीपकों की रौशनी सबके दिलों को भा गयी है।।

जगमगाते खूबसूरत लग रहे नन्हें दिये,
लग रहा जैसे सितारे हों जमीं पर आ गये,
झोंपड़ी महलों के जैसी मुस्कराहट पा गयी है।
दीपकों की रोशनी सबके दिलों को भा गयी है।।


भवन की दीवार को बेनूर वर्षा ने करा था,
गाँव के कच्चे घरों का "रूप" बारिश ने हरा था,
रंग-लेपन से सभी में अब सजावट छा गयी है।
दीपकों की रोशनी सबके दिलों को भा गयी है।।


छँट गया सारा अन्धेरा पास और परिवेश का,
किन्तु भीतरघात से बदहाल भारत देश का,
प्यार जैसे शब्द को भी तो बनावट खा गयी है।
दीपकों की रोशनी सबके दिलों को भा गयी है।।


"गीत-नीड़ को नव-ज्योतियों से जगमगायें" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

!! शुभ-दीपावली !!
 
रोशनी का पर्व है, दीपक जलायें।
नीड़ को नव-ज्योतियों से जगमगायें।।

बातियाँ नन्हें दियों की कह रहीं,
इसलिए हम वेदना को सह रहीं,
तम मिटाकर, हम उजाले को दिखायें।
नीड़ को नव-ज्योतियों से जगमगायें।।

डूबते को एक तृण का है सहारा,
जीवनों को अन्न के कण ने उबारा,
धरा में धन-धान्य को जम कर उगायें।
नीड़ को नव-ज्योतियों से जगमगायें।।

जेब में ज़र है नही तो क्या दिवाली,
मालखाना माल बिन होता है खाली,
किस तरह दावा उदर की वो बुझायें। 
नीड़ को नव-ज्योतियों से जगमगायें।।

आज सब मिल-बाँटकर खाना मिठाई
दीप घर-घर में जलाना आज भाई,
रोज सब घर रोशनी में झिलमिलायें।
नीड़ को नव-ज्योतियों से जगमगायें।।

बुधवार, 22 अक्टूबर 2014

"दोहे-प्रकाश पर्व दीपावली की शुभकामनाएँ" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


दीपक जलता है तभी, जब हो बाती-तेल।
खुशिया देने के लिए, चलता रहता खेल।१।
--
तम हरने के वास्ते, खुद को रहा जलाय।
दीपक काली रात को,  आलोकित कर जाय।२
--
झिलमिल-झिलमिल जब जलें, दीपक एक कतार।
तब बिजली की झालरें, लगती हैं बेकार।३।
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मेधावी मेधा करे, उन्नत करे चरित्र।
मातु शारदे को नहीं, बिसरा देना मित्र।४।
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लक्ष्मी और गणेश के, साथ शारदा होय।
उनका दुनिया में कभी, बाल न बाँका होय।५।
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दीवाली का पर्व है, सबको दो उपहार।
आतिशबाजी का नहीं, दीपों का त्यौहार।६।
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दौलत के मद में नहीं, बनना कभी उलूक।
शिक्षा लेकर पेड़ से, करना सही सुलूक।७।

मंगलवार, 21 अक्टूबर 2014

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