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मंगलवार, 17 जुलाई 2018

रपट "पत्रिका एवं पुस्तकों का विमोचन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

पत्रिका एवं पुस्तकों का विमोचन
       खटीमा (ऊधमसिंहनगर) 15 जुलाई, 2018 को साहित्य शारदा मंच, खटीमा द्वारा ब्लॉक सभागार, खटीमा (ऊधमसिंहनगर) में अपराह्न 2 बजे से पुस्तक विमोचन एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' के व्यक्तित्व-कृतित्व पर केन्द्रित विशेषांक राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका "ट्रू मीडिया" जुलाई - 2018 अंक का विमोचन तत्पश्चात श्रीमती राधा तिवारी (राधेगोपाल) द्वारा रचित सृजन कुंज” (काव्य संग्रह) एवं जीवन का भूगोल” (दोहा संग्रह) का भी सैकड़ों नागरिकों के मध्य विमोचन किया गया। 
जिसमें खटीमा के माननीय विधायक पुष्कर सिंह धामी, खटीमा फाइबर्स के सी.एम.डी. डॉ. आर सी रस्तोगी एवं श्री विजय नाथ शुक्ल उपजिलाधिकारी खटीमा मुख्य अभ्यागत थे। कार्यक्रम का संचालन संस्था के महासचिव डॉ. महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ने किया।
       इस अवसर पर डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक को ड्रूमीडिया के सम्पादक श्री ओमप्रकाश प्रजापति, अशोक कुमार एवं मनोज शर्मा कामदेव ने पगड़ी पहनाकर ड्रूमीडिया गौरव 2018 के सम्मान से अलंकृत किया। मुख्य अभ्यागत डॉ. राकेश चन्द्र रस्तोगी, उपजिलाधिकारी विजयनाथ शुक्ल, विधायक पुष्कर सिंह धामी का अभिनन्दन पत्र के साथ तथा पुस्तकों में अभिमत लिखने वाले व्यक्तियों को शाल ओढ़ा कर सम्मानित किया गया।
     कार्यक्रम में प्रभारी खंडशिक्षा अधिकारी सतीश चन्द्र गुप्ता, राणाप्रताप के प्रबन्धक गीताराम बंसल, दयानन्द इंटर कालेज टनकपुर के रामदेव आचार्य, सवौरा हाईस्कूल के प्रधानाचार्य मनीराम शास्त्री, जिला मन्त्री अरविन्द चौधरी, डॉ. मुकेश कुमार, पूर्व प्रधानाचार्य सुदर्शन वर्मा, गोपालदत्ततिवारी, ट्रूमीडिया के सम्पादक ओमप्रकाश, अशोक कुमार, मनोज कामदेव, प्रधानाचार्य रामदत्त जोशी, नितिन शास्त्री, श्रीमती कविता, श्रीमती अमर भारती, विनीत शास्त्री, श्रीमती पल्लवी, कमलकान्त आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में दिल्ली के सिद्ध साहित्यकार और चित्रकार श्री संजय कुमार गिरि द्वारा बनाया गया डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री का पेंसिल स्कैच भी उनको भेंट किया गया।
उसके बाद कवि गोष्ठी का प्रारम्भ किया गया जिसका संचालन जगदीश कुमुद ने किया जिसमें सरस्वती वन्दना श्री श्रीभगवान मिश्र, श्रीमती राधा तिवारी, अनिल शुक्ल, नरेश तिवारी, डॉ. सिद्धेश्वर सिंह, नबी अहमद मंसूरी, मनोज कामदेव, डॉ. रावेन्दर कौर, रामदेव आर्य, रामचन्द्र प्रेमी, रामरतन यादव, डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री, शहाना कुरैशी, महेन्द्र पांडेय नन्द, कैलाश पांडेय, आकाश कुमार, विपिन जोशी ने काव्य पाठ किया। जिसका प्रसारण ट्रू मीडिया द्वारा चैनल पर प्रसारित किया गया।


























सोमवार, 16 जुलाई 2018

उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहर “हरेला” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

“आज हरेला है”
उत्तराखण्ड की संस्कृति की धरोहर 
“हरेला” 
उत्तराखण्ड का प्रमुख त्यौहार है!

उत्तराखण्ड के परिवेश और खेती के साथ 
इसका सम्बन्ध विशेषरूप से जुड़ा हुआ है! 
हरेला पर्व वैसे तो वर्ष में तीन बार आता है- 
1- चैत्र मास में!
(प्रथम दिन बोया जाता है तथा नवमी को काटा जाता है!)
2- श्रावण मास में
(सावन लगने से नौ दिन पहले आषाढ़ में बोया जाता है और दस दिन बाद श्रावण के प्रथम दिन काटा जाता है!)
3- आश्विन मास में!
(आश्विम मास में नवरात्र के पहले दिन बोया जाता है और दशहरा के दिन काटा जाता है!)   
किन्तु उत्तराखण्ड में श्रावण मास में पड़ने वाले हरेला को ही अधिक महत्व दिया जाता है! क्योंकि श्रावण मास शंकर भगवान जी को विशेष प्रिय है। यह तो सर्वविदित ही है कि उत्तराखण्ड एक पहाड़ी प्रदेश है और पहाड़ों पर ही भगवान शंकर का वास माना जाता है। इसलिए भी उत्तराखण्ड में श्रावण मास में पड़ने वाले हरेला का अधिक महत्व है!  
सावन लगने से नौ दिन पहले आषाढ़ में हरेला बोने के लिए किसी थालीनुमा पात्र या टोकरी का चयन किया जाता है। इसमें मिट्टी डालकर गेहूँ, जौ, धान, गहत, भट्ट, उड़द, सरसों आदि 5 या 7 प्रकार के बीजों  को बो दिया जाता है। नौ दिनों तक इस पात्र में रोज सुबह को पानी छिड़कते रहते हैं। दसवें दिन इसे काटा जाता है। 
4 से 6 इंच लम्बे इन पौधों को ही हरेला कहा जाता है।
घर के सदस्य इन्हें बहुत आदर के साथ अपने शीश पर रखते हैं।
घर में सुख-समृद्धि के प्रतीक के रूप में हरेला बोया व काटा जाता है!
इसके मूल में यह मान्यता निहित है कि हरेला जितना बड़ा होगा उतनी ही फसल बढ़िया होगी! साथ ही प्रभू से  फसल अच्छी होने की कामना भी की जाती है! 

आज हरेला है !
उत्तराखण्ड के इस पावन पर्व पर  
मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ!!

रविवार, 15 जुलाई 2018

"विमोचन एवं काव्य गोष्ठी"


आज 15 जुलाई, 2018 को अपराह्न् 2 बजे से साहित्य शारदा मंच, खटीमा द्वारा ब्लॉग सभागार, खटीमा (ऊधमसिंहनगर) में
समय-अपराह्न 2 बजे से पुस्तक विमोचन एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें-
श्रीमती राधा तिवारी (राधेगोपाल) द्वारा रचित सृजन कुंज” (काव्य संग्रह) एवं जीवन का भूगोल” (दोहा संग्रह) का विमोचन तथा
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' के व्यक्तित्व-कृतित्व पर केन्द्रित विशेषांक राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका "ट्रू मीडिया" जुलाई - 2018 अंक का सैकड़ों नागरिकों के मध्य विमोचन किया गया। 
जिसमें खटीमा के माननीय विधायक पुष्कर सिंह धामी, खटीमा फाइबर्स के सी.एम.डी. डॉ. आर सी रस्तोगी एवं श्री विजय नाथ शुक्ल उपजिलाधिकारी खटीमा मुख्य अभ्यागत थे। कार्यक्रम का संचालन संस्था के महासचिव डॉ. महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ने किया।
--
तत्पश्चात कवि गोष्ठी
जिसका प्रसारण ट्रू मीडिया द्वारा चैनल पर होगा।
विस्तृत विवरण कल तक प्रस्तुत किया जायेगा।



शनिवार, 14 जुलाई 2018

बाल कविता "बच्चों का मन होता सच्चा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सीधा-सादा. भोला-भाला।
बच्चों का संसार निराला।।

बचपन सबसे होता अच्छा।
बच्चों का मन होता सच्चा।

पल में रूठें, पल में मानें।
बैर-भाव को ये क्या जानें।।

प्यारे-प्यारे सहज-सलोने।
बच्चे तो हैं स्वयं खिलौने।।

बच्चों से नारी है माता।
ममता से है माँ का नाता।।

बच्चों से है दुनियादारी।
बच्चों की महिमा है न्यारी।।

कोई बचपन को लौटा दो।
फिर से बालक मुझे बना दो।।

ग़ज़ल "इस जीवन की शाम ढली" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


कर्कश सुर से तो होती है, खामोशी की तान भली
जल जाता शैतान पतिंगा, शम्मा सारी रात जली

दो पल का तूफान, तबाही-बरबादी को लाता है
कभी न थकती मन्द हवा, जो लगातार दिन-रात चली

बचपन-यौवन साथ न देता, कभी किसी का जीवन भर
सिर्फ बुढ़ापे के ही संग में, इस जीवन की शाम ढली

सूखे भी हों पात शज़र के, वो छाया ही देते हैं
छलते हैं मुस्कानों से, ग़ुलशन के छलिया फूल-कली

करता दग़ा हमेशा है ये, नहीं रूप पर जाना तुम
लोग हमेशा से कहते हैं, होता है ये हुस्न छली 

शुक्रवार, 13 जुलाई 2018

दोहे "सहमे हुए कपोत" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

अनुभव पर मेरे मुझे, रहता सदा यकीन। 
सागर की हर बूँद का, पानी है नमकीन।।

देशद्रोह-अलगाव की, जहाँ भड़कती आग। 
उस केसर के खेत में, लगे खून के दाग।।

मन को अब भाती नहीं, बहती हुई बयार। 
इसीलिए मैली हुई, गंगा जी की धार।।

खूनी पंजे देखकर, सहमे हुए कपोत। 
खुद को सूरज कह रहे, अब छोटे खद्योत।।

निर्धन को धनवान सा, सुलभ सदा हो न्याय। 
नहीं किसी के साथ हो भेद-भाव अन्याय।।

छम-छम पानी बरसता, बादल करते शोर। 
हरियाली बिखरी हुई, धरती पर चहुँ ओर।।

मन को सुमन बनाइए, रखिए सरल सुभाव। 
कोमल होने चाहिएँ, मानस के अनुभाव।।

कभी बन्द मत कीजिए, आशाओं के द्वार। 
मजबूती से थामना, लहरों में पतवार।।

चोटी-बिन्दी-मेंहदी, आपस में बतियाय। 
विरह और अनुराग में, सुहागिनें बौराय।।

नहीं हमें कुछ चाहिए, शासन में अधिकार। 
हम तो करना जानते, जन-मानस को प्यार।।




गुरुवार, 12 जुलाई 2018

दोहे "लोग हो रहे मस्त" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सिक्कों में बिकने लगा, दुनिया में ईमान।
लोग रूप की धूप परकरते हैं अभिमान।।

सदाचार का हो गयादिन में सूरज अस्त। 
अपनी ही करतूत परलोग हो रहे मस्त।।

तन-मन मैले हो रहेझूठे हैं उपवास। 
मेल-जोल का हो गयामेला बहुत उदास।।

पंथ भिन्न तो क्या हुआसबका है ये देश।
मेल-जोल से ही यहाँ, बदलेगा परिवेश।।

भारत माता कर रहीकब से करुण पुकार। 
गद्दारों को मार दोओ भगवा सरकार।।

अन्न और जल हो गयादूषण से भरपूर। 
जनसाधारण तो हुआआज मजे से दूर।।

जनता के ही राज मेंजनता सुख से दूर। 
मजदूरी मिलती नहींपढ़े-लिखे मजबूर।।

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