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वसुन्धरा को काले अंग्रेजों से, मुक्त कराने का।। बहुत समय के बाद आज फिर, गांधी ने अवतार लिया। भ्रष्टाचार मिटाने को, सत्याग्रह का व्रत धार लिया।। देख आमरण अनशन को, सरकार हो गई जब आहत। नकली आँसू बहा-बहाकर, देती है झूठी राहत।। डाँवाडोल हो रहा अब तो, मक्कारों का सिंहासन। गद्दारों का जल्दी ही, अब छिनने वाला है आसन।। भोली-भाली मीनों का अब होगा काम तमाम नहीं। घड़ियालों का मानसरोवर में, होगा विश्राम नहीं।। नाती-पोतों के शासन की परम्परा नहीं छायेगी। जनता पर जनता के शासन की अब बारी आयेगी।। गर्दन को जो नाप सके, अब लोकपाल वो आयेगा। घूसखोर कितना बलिष्ट हो इससे बच ना पायेगा।। जुग-जुग जिएँ हमारे अन्ना, अलख जगाएँ जन-जन में। रिश्वतखोरी के विकार अब, कभी न आयें तन-मन में।। |
