-- फिर से उपवन के सुमनों में देखो यौवन मुस्काया है। उपहार हमें कुछ देने को, नूतन सम्वत्सर आया है।। उजली-उजली ले धूप सुखद, फिर सुख का सूरज सरसेगा, चौमासे में बादल आकर, फिर उमड़-घुमड़ कर बरसेगा, फिर नई ऊर्जा देने को, नूतन सम्वत्सर आया है।। -- क्रिसमस-दीवाली-ईद, दिलों में खुशियाँ लेकर आयेगी, भूले-बिछुड़ों को अपनों से, आ कर फिर गले मिलायेगी, प्रगति के खुलते द्वार लिए, नूतन सम्वत्सर आया है।। -- पागलपन का उन्माद न हो, हो और न कोई बँटवारा, शस्त्रों की भूख मिटे मन से, फैले जग में भाईचारा, भू का अभिनव शृंगार लिए, नूतन सम्वत्सर आया है।। -- शिक्षा में हो विज्ञान भरा, गुरुओं का आदर-मान रहे, प्राचीन धरोहर बनी रहे, मर्यादा का भी ध्यान रहे, नवल-अमल सुविचार लिए, नूतन सम्वत्सर आया है।। -- शासक अपने खुद्दार बनें, गद्दार न गद्दी को पाये, सारे जग में सबसे अच्छा, गणतन्त्र हमारा कहलाए, झंकृत वीणा के तार लिए, नूतन सम्वत्सर आया है।। -- |
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मंगलवार, 21 मार्च 2023
गीत "प्रगति के खुलते द्वार लिए, नूतन सम्वत्सर आया है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
रविवार, 30 मार्च 2014
"नवसम्वत्सर आया है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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फिर से उपवन के सुमनों में
देखो यौवन मुस्काया है।
उपहार हमें कुछ देने को,
नूतन सम्वत्सर आया है।।
उजली-उजली ले धूप सुखद,
फिर सुख का सूरज सरसेगा,
चौमासे में बादल आकर,
फिर उमड़-घुमड़ कर बरसेगा,
फिर नई ऊर्जा देने को,
नूतन सम्वत्सर आया है।।
क्रिसमस-दीवाली-ईद,
दिलों में खुशियाँ लेकर आयेगी,
भूले-बिछुड़ों को अपनों से,
आ कर फिर गले मिलायेगी,
प्रगति के खुलते द्वार लिए,
नूतन सम्वत्सर आया है।।
पागलपन का उन्माद न हो,
हो और न कोई बँटवारा,
शस्त्रों की भूख मिटे मन से,
फैले जग में भाईचारा,
भू का अभिनव शृंगार लिए,
नूतन सम्वत्सर आया है।।
शिक्षा में हो विज्ञान भरा,
गुरुओं का आदर-मान रहे,
प्राचीन धरोहर बनी रहे,
मर्यादा का भी ध्यान रहे,
नवल-अमल सुविचार लिए,
नूतन सम्वत्सर आया है।।
शासक अपने खुद्दार बनें,
गद्दार न गद्दी को पाये,
सारे जग में सबसे अच्छा,
गणतन्त्र हमारा कहलाए,
झंकृत वीणा के तार लिए,
नूतन सम्वत्सर आया है।।
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शुक्रवार, 23 मार्च 2012
"साढ़े तीन साल के बालक द्वारा तबला वादन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
देश-वेश-परिवेश में, खुशियाँ हों भरपूर।१। बाधाएँ सब दूर हों, हो आपस में मेल। मन के उपवन में सदा, बढ़े प्रेम की बेल।२। एक मंच पर बैठकर, करें विचार विमर्श। अपने प्यारे देश का, कैसे हो उत्कर्ष।३। मर्यादा के साथ में, खूब मनाएँ हर्ष। बालक,वृद्ध-जवान को, मंगलमय हो वर्ष।४। मित्रों! गोष्ठी में माँ शारदा के चित्र पर दीप प्रज्ज्वन भी किया गया। गोष्ठी का शुभारम्भ श्री नृसिंह कुँवर जी ने सरस्वती वन्दना से किया। जिसमें तबले पर संगत उनके साढ़े तीन वर्षीय पुत्र ललित (लक्की) ने की। इस अवसर पर गिरीश चन्द्र जी द्वारा कूर्मांचलि गीत प्रस्तुत किया गया! इसके बाद नानकमत्ता से पधारे अवनीश मिश्र जी ने अपने ओजस्वी मुक्त प्रस्तुत किये। रूमानियत के शायर गुरुसहाय भटनागर बदनाम जी ने अपनी गज़लों से समा बाँध दिया! स्थानीय आश्रम पद्धति विद्यालय में अध्यापन कर रहे श्री शिव भगवान मिश्र ने कबीरदास की एक साखी का सस्वर पाठ किया! उर्दू अदब के उस्ताद शायर हामिद हुसैन "हामिद" ने अपनी एक गज़ल का पाठ किया! इस अवसर पर डॉ, राजकिशोर सक्सेना ने अपने कुछ दोहे और कविताओं का पाठ किया। इसके बाद डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" (मेरा) का भी नम्बर आया। मैंने भी इस अवसर पर नव सम्वत्सर के उपलक्ष्य में मैंने 4 दोहे और एक गीत प्रस्तुत किया। खटीमा के हास्य-व्यंग्य के कवि गेन्दालाल शर्मा "निर्जन" ने कुछ अच्छे व्यंग्य प्रस्तुत किये। खटीमा के युवा शायर शहजादा अबसार अहमद सिद्दीकी ने इस अवसर पर अपने मुक्तकों से समा बाँध दिया। थारू राजकीय इ.कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य श्री उदय प्रताप सिंह जी ने नवसम्वत्सर के इतिहास पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का सफल संचालन संस्कार भारती के सम्भाग प्रमुख डॉ.गंगाधर राय ने किया। गोष्ठी में श्रोताओं ने भी सहभागिता की। |
इस बालक की विशेषता रह रही कि गोष्ठी अपराह्न 3-30 बजे शुरू हुई और 5-30 पर समाप्त हुई। इस दो घण्टे की अवधि में यह बालक शान्त भाव से बैठा रहा और वक्ताओं की बातों को बहुत ध्यान से सुनता रहा। |
गुरुवार, 22 मार्च 2012
"नूतन सम्वत्सर आया है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
देखो यौवन मुस्काया है। उपहार हमें कुछ देने को, नूतन सम्वत्सर आया है।। उजली-उजली ले धूप सुखद, फिर सुख का सूरज सरसेगा, चौमासे में बादल आकर, फिर उमड़-घुमड़ कर बरसेगा, फिर नई ऊर्जा देने को, नूतन सम्वत्सर आया है।। क्रिसमस-दीवाली-ईद, दिलों में खुशियाँ लेकर आयेगी, भूले-बिछुड़ों को अपनों से, आ कर फिर गले मिलायेगी, प्रगति के खुलते द्वार लिए, नूतन सम्वत्सर आया है।। पागलपन का उन्माद न हो, हो और न कोई बँटवारा, शस्त्रों की भूख मिटे मन से, फैले जग में भाईचारा, भू का अभिनव शृंगार लिए, नूतन सम्वत्सर आया है।। शिक्षा में हो विज्ञान भरा, गुरुओं का आदर-मान रहे, प्राचीन धरोहर बनी रहे, मर्यादा का भी ध्यान रहे, नवल-अमल सुविचार लिए, नूतन सम्वत्सर आया है।। शासक अपने खुद्दार बनें, गद्दार न गद्दी को पाये, सारे जग में सबसे अच्छा, गणतन्त्र हमारा कहलाए, झंकृत वीणा के तार लिए, नूतन सम्वत्सर आया है।। |
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