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सोमवार, 30 सितंबर 2019

दोहे "नौ दिन तक उपवास" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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करिये नियम-विधान से, नौ दिन तक उपवास।
जगदम्बा माँ आपकी, पूर्ण करेंगी आस।।
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शुद्ध आचरण में रहेउज्जवल चित्र-चरित्र।
प्रतिदिन तन के साथ मेंमन को करो पवित्र।।
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शाकाहारी मनुज ही, पूजा के हैं पात्र।
खान-पान में शुद्धता, सिखलाते नवरात्र।।
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माता के नवरात्र हों, या हो कोई पर्व।
अपने-अपने पर्व पर, होता सबको गर्व।।
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त्यौहारों की शृंखलाका बन गया सुयोग।
मस्ती में उल्लास में, झूम रहे हैं लोग।।
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मत-मजहब का भूल से, मत करना उपहास।
होता इनके मूल में, छिपा हुआ इतिहास।।  
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त्यौहारों के नाम पर, लोक-दिखावा मात्र।
पाश्चात्य परिवेश में, गुम हो गये सुपात्र।।
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करते पाठन-पठन को, विद्यालय में छात्र।।
सफल वही होते सदा, जो होते हैं पात्र।।
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रविवार, 29 सितंबर 2019

दोहे "रक्खो व्रत-उपवास" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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श्राद्ध गये तो आ गयेमाता के नवरात्र
लीला का मंचन करेंरामायण के पात्र।।
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सबको देते प्रेरणामाता के नवरूप।
निष्ठा से पूजन करोलेकर दीपक-धूप।।
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सच्चे मन से कीजिएमाता का गुण-गान।
माता तो सन्तान का, रखती पल-पल ध्यान।।
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अभ्यागत को देखकरहोना नहीं उदास।
करो प्रेम से आरतीरक्खो व्रत-उपवास।।
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शुद्ध बनाने के लिएआते हैं नवरात्र।
ज्ञानी बनने के लिएपढ़ो नियम से शास्त्र।।
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सारे सपनों को करेंमाता जी साकार।
कर्मों से ही तो बनेजीवन का आधार।।
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ज्ञानदायिनी शारदेभर दो खाली ताल।
वीणा की झंकार सेकर दो मुझे निहाल।।
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ग़ज़ल "30 सितम्बर जन्म दिन मेरी श्रीमती" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जन्मदिन पर शब्द नूतन गढ़ रहा हूँ
मैं अभी तक आपको ही पढ़ रहा हूँ
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जिन्दगी में हैं बहारें आपसे ही
आपके कारण समय से लड़ रहा हूँ
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नाखुदा की आप ही पतवार हो
आपके कारण अगाड़ी बढ़ रहा हूँ
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नित नये अध्याय अब भी जोड़ता हूँ
कामनाओं में नगीने जड़ रहा हूँ
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साथ मत तुम छोड़ देना रास्ते में
आप हो तो सीढ़ीयों को चढ़ रहा हूँ
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दीप बनकर भारती के थाल का
रोज हरसिंगार बनकर झड़ रहा हूँ
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गीत को सुर-ताल देने के लिए
रूप की ढोलक पुरानी मढ़ रहा हूँ
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शनिवार, 28 सितंबर 2019

दोहे "भारत देश महान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

तोड़े प्रोटोकोल के, सारे नियम-विधान।
मोदी जी को ट्रम्प ने, दिया देश में मान।।
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बोला जग में शान से, जब भारत का लाल।
विश्वमञ्च पर पाक को, भारी हुआ मलाल।।
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गीदड़भभकी दे रहा, कायर पाकिसतान।
खुले आम उसने कहा, भारत देश महान।।
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मर्यादा का है नहीं, रक्खा जिसने ध्यान।
खौफ और आतंक का, उसने दिया बयान।।
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मँडरारता है देखता, अपने सिर पर काल।
मिटता देख वजूद को, करने लगा बबाल।।
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चन्द दिनों का पाक है, दुनिया में महमान।
खण्ड-खण्ड हो जायगा, पापी पाकिसतान।।
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अमरीका से है मिली, जिसको खूब लताड़।
चमन आज नापाक का, वो खुद रहा उजाड़।।
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शुक्रवार, 27 सितंबर 2019

गीत "नाज़ुक कलाई मोड़ ना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

अब पढ़ाई और लिखाई छोड़ ना।
सीख ले अब पत्थरों को तोड़ना।।

काम मिलता ही नहीं हैशिक्षितों के वास्ते,
गुज़र करने के लिएअवरुद्ध हैं सब रास्ते,
इस लिए मेहनत से नाता जोड़ ना।
सीख ले अब पत्थरों को तोड़ना।।

समय कटता है हमारा पत्थरों के साथ में,
वार करने को जिगर पर हथौड़ा है हाथ में.
देखकर नाज़ुक कलाई मोड़ ना।
सीख ले अब पत्थरों को तोड़ना।।

कोई रिक्शा खींचता हैकोई बोझा ढो रहा,
कोई पढ़-लिखकर यहाँ पर भाग्य को है रो रहा,
आ हमारे साथ श्रम को ओढ़ ना।
सीख ले अब पत्थरों को तोड़ना।।
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गुरुवार, 26 सितंबर 2019

ग़ज़ल "ईमान आज तो" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

खुद को खुदा समझ रहाइंसान आज तो
फिरकों में है सिमट गया. जहान आज तो
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कैसे सुधार हो भलाअपने समाज का
कौड़ी के मोल बिक रहाईमान आज तो
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भरकर लिबास आ गये, शेरों का भेड़िए
सन्तों के भेष में छिपे, हैवान आज तो
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जिसको नहीं है इल्म, वो इलहाम बाँटता
उड़ता बग़ैर पंख के, नादान आज तो
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बस्ती में खूब हो गयी, कौओं की मौज़ है
चिड़िया का घोंसला हुआ, सुनसान आज तो
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ज़न्नत के ख़्वाब को दिखा इलहाम बेचते
चलने लगी अधर्म की, दुकान आज तो
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सन्तों को सुरक्षा की ज़रूरत है किसलिए
बौना हुआ समाज का, विधान आज तो
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मिलते हैं सभी ऐश के सामान जेल में
दुष्टो को मिल गये यहाँभगवान आज तो
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घर में खुदा के हो रहे, हैवानियत के जश्न
मुश्किल हुई है रूप की पहचान आज तो
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दोहे "मिली डाँट-फटकार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

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मोदी जी ट्रम्प जब, ज्ञान रहे थे सीख।
शासक तब नापाक का, माँग रहा था भीख।।
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लिए कटोरा हाथ में, करता पाक गुहार।
मगर ट्रम्प सुनता नहीं, मक्कारी मनुहार।।
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जान गया संसार जब, खोटी उसकी सोच।
सदमें में इमरान अब, बाल रहा है नोच।।
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विश्वमंच पर पाक की, हुई करारी हार।
दिवालिए को विश्व में, देगा कौन उधार।।
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 उल्लू देख प्रकाश को, आँख रहा है मूँद।
छल की गागर में नहीं, बची नेह की बूँद।।
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उद्गम अब आतंक का, जान गया संसार।
भिक्षा में मक्कार को, मिली डाँट-फटकार।।
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देख लिया है पाक की, जनता ने अन्दाज।
घर जाकर इमरान का, छिन जायेगा ताज।।
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मंगलवार, 24 सितंबर 2019

दोहे "रोटी भरती पेट" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

फूली रोटी देखकरमन होता अनुरक्त।
हँसी-खुशी से काट लोजैसा भी हो वक्त।१।
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फूली-फूली रोटियाँसजनी रही बनाय।
बाट जोहती है सदाकब साजन घर आय।२।
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घर के खाने में भराघरवाली का प्यार।
सजनी खाने के लिएकरती है मनुहार।३।
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फूली-फूली रोटियाँमन को करें विभोर।
इनको खाने देश मेंआते रोटीखोर।४।
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नगर-गाँव में बढ़ रहेअब तो खूब दलाल।
रोटीखोरों ने कियावतन आज कंगाल।५।
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रोटी का अस्तित्व हैजीवन में अनमोल।
दुनिया में सबसे बड़ारोटी का भूगोल।६।
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रोटी सबका लक्ष्य हैरोटी है तकदीर।
रोटी के बिन जगत मेंचलता नहीं शरीर।७।
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जीवन जीने के लिएरोटी है आधार।
अगर न होती रोटियाँमिट जाता संसार।८।
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हो रोटी जब पेट मेंभाते तब उपदेश।
रोजी-रोटी के लिएजाते लोग विदेश।९।
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तब रोटी अच्छी लगे, जब लगती है भूख। 
कुनबे और पड़ोस मेंअच्छे रखो रसूख।१०।
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बाहर खाने में नहींआता कोई स्वाद।
होटल में जाकर सदाहोता धन बरबाद।११।
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दौलत के बाजार मेंबिकते रोज रसूख।
रोटी की कम भूख हैधन की ज्यादा भूख।१२।
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खाकर माल हराम काकरना मत आखेट।
श्रम से अर्जित रोटियाँभरती सबका पेट।१३।
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