-- लोग समझते हैं यही, दशकन्धर था दुष्ट। लेकिन कलि के काल में, दुष्ट हो रहे पुष्ट।। -- रावण युग में था नहीं, इतना पापाचार। वर्तमान में है नहीं, लोगों में आचार।। -- सत्य आचरण को दिया, लोगों ने अब छोड़। केवल पुतले दहन की, लगी हुई है होड़।। -- पुतले सदियों से सभी, जला रहे हर साल। मन का रावण आज भी, लोग रहे हैं पाल।। -- अच्छाई के सामने, रही बुराई जीत। रीत-रीत ही रह गयी, अब तो केवल रीत।। -- एक दूसरे की यहाँ, कभी न खीँचो टाँग। चीन-पाक से युद्ध हो, यही समय की माँग।। -- महँगाई की राह में, बिछे हुए हैं शूल। भोली जनता के लिए, समय नहीं अनुकूल।। -- बैरी अपना पाक है, लंका अपना मीत। अब तो पाकिस्तान की, मिट्टी करो पलीत।। -- विजयादशमी का तभी, सपना हो साकार। नक्शे पर से जब मिटे, बैरी का आकार।। -- जो समाज को दे दिशा, वो ही है साहित्य। दोहों में मेरे नहीं, होता है लालित्य।। -- |
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रविवार, 13 अक्टूबर 2024
दोहे "दशकन्धर था दुष्ट" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
शनिवार, 12 अक्टूबर 2024
दोहे "विजयादशमी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
अच्छाई के सामने, गयी बुराई हार।। -- विजयादशमी विजय का, पावन है त्यौहार। आज झूठ है जीतता, सत्य रहा है हार।। -- रावण के जब बढ़ गये, भू पर अत्याचार। लंका में जाकर उसे, दिया राम ने मार।। -- तब से पुतले दहन का, बढ़ता गया रिवाज। मन का रावण आज तक, जला न सका समाज।। -- आज भोग में लिप्त हैं, योगी और महन्त। भोली जनता को यहाँ, भरमाते हैं सन्त।। -- दावे करते हैं सभी, बदलेंगे तकदीर। अपनी रोटी सेंकते, राजा और वजीर।। -- मनसा-वाचा-कर्मणा, नहीं सत्य भरपूर। आम आदमी मजे से, आज बहुत है दूर।। -- |
शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2024
दोहे "नवमी तो श्रीराम की, करती मार्ग प्रशस्त" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
-- त्यौहारों की शृंखला, लाते हैं नवरात्र।। साफ कीजिए नित्य ही, मन के मैले पात्र।। -- अगर आचरण शुद्ध हो, उज्जवल रहे चरित्र। प्रतिदिन तन के साथ में, मन भी रहे पवित्र।। -- दुर्गा माँ की अष्टमी, देती है सन्देश। जग में पूजा-पाठ का, बन जाये परिवेश।। -- नवमी तो श्रीराम की, करती मार्ग प्रशस्त। बैरी के कर दीजिए, सभी हौसले पस्त।। -- विजयादशमी विजय का, है पावन त्यौहार। उत्सव मानवमात्र के, जीवन का आधार।। -- |
गुरुवार, 10 अक्टूबर 2024
दोहे "कन्या-पूजन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
कन्या
पूजन के लिए, है प्रसाद तैयार। आओ
देवी जीमने, भोज करो स्वीकार।। आई
नवमी-अष्टमी, सजे हुए है थाल। हलवा-पूड़ी
से सजा, माता का पण्डाल।। होता
हो जिस देश में, नारी का सम्मान। दुनियाभर
के लेग सब, उसको देते मान।। होता
है जिस देश में, नारी का अपकर्ष। अबला
नारी का वहाँ, कैसे हो उत्कर्ष।। बेटा-बेटी
के लिए, हों समता के भाव। मिल-जुलकर
मझधार से, पार लगाओ नाव।। प्रतिदिन
माता दिवस है, प्रतिदिन पुत्री पर्व। व्रत-पूजन
के साथ में, करो स्वयं पर गर्व।। |
बुधवार, 9 अक्टूबर 2024
बालकविता "राम नाम है सबसे प्यारा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
-- जो करता है अच्छे काम। उसका ही होता है नाम।। -- मर्यादा जो सदा निभाता। उसको राम पुकारा जाता। -- राम नाम है सबसे प्यारा। निर्बल का है एक सहारा।। -- सदाचार होता सुखदायक। जिससे राम बने गणनायक।। -- समता का व्यवहार किया। जीवन का आधार दिया।। -- जब आई सम्मुख अच्छाई।। हुई पराजित सकल बुराई।। -- करो न कुंठित प्रतिभाओं को। करो साक्षर ललनाओं को।। -- हो हर बालक राम जब। विश्वगुरू हो देश तब।। -- |
मंगलवार, 8 अक्टूबर 2024
ग़ज़ल "आका का यहाँ रुतबा सलामत है " (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
छुरी को जब मिले मौका, हमेशा वार करती है छुरी मीठी हो या कड़वी, छिपी उसमें कयामत है -- बगीचा सींचना होगा, सभी को नेह के जल से यहाँ जनतन्त्र है जिन्दा, नहीं कोई रियासत है -- लगे प्रतिबन्ध हों कितने, बशर तो उफ नहीं करते चमन को लूटने में भी, उन्हें खासी महारत है -- हिमाक़त को हिमाक़त भी, रियाया कह नहीं सकती खुदा के बाद आका का, यहाँ रुतबा सलामत है -- कोई सरनाम होता है, कोई गुमनाम रहता है सदर के नाम पर होेती, हुकूमत में हजामत है -- घिनौने 'रूप' को उनके, सुहाना बोलना पड़ता शराफत है हिरासत में, हिमाकत में निजामत है -- |
सोमवार, 7 अक्टूबर 2024
गीत "सजने लगी हैं थालियाँ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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आज मेरे छोटे से शहर में एक बड़े नेता जी पधार रहे हैं। उनके चमचे जोर-शोर से प्रचार करने में जुटे हैं। रिक्शों व जीपों में लाउडस्पीकरों से उद्घ...
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इन्साफ की डगर पर , नेता नही चलेंगे। होगा जहाँ मुनाफा , उस ओर जा मिलेंगे।। दिल में घुसा हुआ है , दल-दल दलों का जमघट। ...
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आसमान में उमड़-घुमड़ कर छाये बादल। श्वेत -श्याम से नजर आ रहे मेघों के दल। कही छाँव है कहीं घूप है, इन्द्रधनुष कितना अनूप है, मनभावन ...
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"चौपाई लिखिए" बहुत समय से चौपाई के विषय में कुछ लिखने की सोच रहा था! आज प्रस्तुत है मेरा यह छोटा सा आलेख। यहाँ ...
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