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बुधवार, 17 जून 2009

‘‘वर्षा ऋतु’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

आसमान में उमड़-घुमड़ कर छाये बादल।

श्वेत-श्याम से नजर आ रहे मेघों के दल।
कही छाँव है कहीं घूप है,इन्द्रधनुष कितना अनूप है,

मनभावन रंग-रूप बदलता जाता पल-पल।
आसमान में उमड़-घुमड़ कर छाये बादल।।
मम्मी भीगी , मुन्नी भीगी, दीदी जी की चुन्नी भीगी,
मोटी बून्दें बरसाती, निर्मल-पावन जल।
आसमान में उमड़-घुमड़ कर छाये बादल।।
हरी-हरी उग गई घास है, धरती की बुझ गई प्यास है,
नदियाँ-नाले नाद सुनाते जाते कल-कल।
आसमान में उमड़-घुमड़ कर छाये बादल।।
बिजली नभ में चमक रही है, अपनी धुन में दमक रही है,

वर्षा ऋतु में कृषक चलाते खेतो में हल।

आसमान में उमड़-घुमड़ कर छाये बादल।।
(चित्र गूगल सर्च से साभार)
गद्य पढ़ने के लिए मेरे निम्न चिट्ठे भी देखें-
http://uchcharandangal.blogspot.com/
http://powerofhydro.blogspot.com/

15 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय डॉ. साहब,

    वर्षा के सभी आयामों को अपने में समेटे कविता भिगो देती है। क्लासिकल टच वाली कविता पढवाने के लिये आपका आभार।

    आशीर्वादाकांक्षी,

    मुकेश कुमार तिवारी

    उत्तर देंहटाएं
  2. एक सुन्दर कविता के साथ कई खुब सूरत तस्वीरो से सजी .......एक अच्छी पोस्ट

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह। शास्त्री जी अद्भुत कम्पोज़िशन है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह डॉ साहब आपकी 'वर्षा' में भीगकर तो मजा आ गया....परन्तु अब कहाँ ऐसी फुहार...

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत लाजवाब रचना. बस भीग ही गये इस मौसम में.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  6. बादलों की तस्वीरें देख कर सचमुच वर्षा का आभास सा होने लगा.सुन्दर रचना भी..बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  7. maम्यंक जी आज अच्छे समय पर कवित कही आज हमारे यहाँ बादल छा रहे हैं बहुत सुन्दर आभार

    उत्तर देंहटाएं
  8. वर्षा का बहुत सुंदर चित्रण किया है और चित्र भी बडे मनोहारी हैं।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुंदर भाव ..सुंदर अभिव्यक्ति ..!!बधाई ..

    उत्तर देंहटाएं
  10. वर्ष ऋतु आने वाली है ... और आपकी कविता वर्षा के सारे रंग दिखा रही है ..सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  11. वर्षा ऋतु का मनमोहक चित्र दिखाया है आपने.

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  12. वर्षा ऋतु का मनमोहक चित्र
    सुंदर भाव, सुंदर अभिव्यक्ति
    बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  13. varsha ritu ke baare me itne sahaj sabdo ka upyog kar itni achchhi kavita likhi h aapne pad kar hriday anand se bhar gaya or aapke bloagspot par bahut sari kavitaye h me un sabhi kavitao ko padhna chahta hu or me padhunga bhi dhanyhua me aapke blogspot par aa kar

    उत्तर देंहटाएं

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