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अन्नकूट पूजा करो, गोवर्धन है आज।
गोरक्षा से सबल हो, पूरा देश समाज।१।
श्रीकृष्ण ने कर दिया, माँ का ऊँचा भाल।
सेवा करके गाय की, कहलाये गोपाल।२।
गौमाता से ही मिले, दूध-दही, नवनीत।
सबको होनी चाहिए,
गौमाता
से प्रीत।३।
गइया के घी-दूध से, बढ़ जाता है ज्ञान।
दुग्धपान करके बने, नौनिहाल बलवान।४।
कैमीकल का उर्वरक, कर देगा बरबाद।
फसलों में डालो सदा, गोबर की ही खाद।५।
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गुरुवार, 19 अक्टूबर 2017
दोहे "गोवर्धन पूजा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
दोहे "दीवाली पर देवता, रहते तभी समीप" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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दीवाली
पर शारदे, करना यह उपकार।
जीवनभर
सुनता रहूँ, वीणा की झंकार।।
जलें
सभी के नीड़ में, माटी के जब दीप।
दीवाली
पर देवता, रहते तभी समीप।।
दीप
जलाने के लिए, हो बाती में तेल।
तब
ही तम की नाक में, डालें दीप नकेल।।
ब्रह्मा
जी ने रच दिये, अलग-अलग आकार।
किन्तु
एक ही रूप के, रचता पात्र कुम्हार।।
स्वस्थ
रहे सब जगत में, दाता दो वरदान।
बरखा-गरमी-शीत
में, दुखी न हो इंसान।।
ज्ञान
बाँटने से मनुज, होता नहीं विपन्न।
विद्या
धन का दानकर, बन जाओ सम्पन्न।।
मात
शारदे को कभी, मत बिसराना मित्र।
मेधावी
मेधा करे, उन्नत करे चरित्र।।
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गीत "भा रही दीपावली" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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दीप खुशियों के जलाओ, आ रही दीपावली।
रौशनी से जगमगाती, भा रही दीपावली।।
क्या करेगा तम वहाँ, होंगे अगर नन्हें दिये,
चाँद-तारों को करीने से, अगर रौशन किये,
हार जायेगी अमावस, छा रही दीपावली।
नित्य घर में नेह के, दीपक जलाना चाहिए,
उत्सवों को हर्ष से, हमको मनाना चाहिए,
पथ हमें प्रकाश का, दिखला रही दीपावली।
शायरों को शम्मा से, कवियों को दीपक से लगाव,
महकते मिष्ठान से, होता सभी को है लगाव,
गीत-ग़ज़लों का तराना, गा रही दीपावली।
गजानन के साथ, लक्ष्मी-शारदा की वन्दना,
देवताओं के लिए अब, द्वार करना बन्द ना,
मन्त्र को उत्कर्ष के, सिखला रही दीपावली।
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बुधवार, 18 अक्टूबर 2017
"धनतेरस, नर्क चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धनपूजा और भइयादूज की शुभकामनाएँ"
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आलोकित हो वतन हमारा।
हो सारे जग में उजियारा।।
कंचन जैसा तन चमका हो,
उल्लासों से मन दमका हो,
खुशियों से महके चौबारा।
हो सारे जग में उजियारा।।
आओ अल्पना आज सजाएँ,
माता से धन का वर पाएँ,
आओ दूर करें अँधियारा।
हो सारे जग में उजियारा।।
घर-घर बँधी हुई हो गैया,
तब आयेगी सोन चिरैया,
सुख का सरसेगा फव्वारा।
होगा तब जग में उजियारा।।
आलोकित हो वतन हमारा।
हो सारे जग में उजियारा।।
♥♥♥
पर्वों की शृंखला में
आप सभी को
धनतेरस,
नर्क चतुर्दशी,
दीपावली,
गोवर्धनपूजा
और
भइयादूज की
हार्दिक शुभकामनाएँ!
♥ डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”♥
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गीत "मधुर वाणी बनाएँ हम" (दीपावली की शुभकामनाएँ)
हुआ मौसम गुलाबी अब,
चलो दीपक जलाएँ हम।
घरों में धान आये हैं,
दिवाली को मनाएँ हम।
बढ़ी है हाट में रौनक,
सजी फिर से दुकानें हैं,
मधुर मिष्ठान को खाकर,
मधुर वाणी बनाएँ हम।
मनो-मालिन्य को अपने,
मिटाने का समय है अब,
घरों के साथ आँगन को,
करीने से सजाएँ हम।
छँटें बादल गगन से हैं,
हुए निर्मल सरोवर हैं,
चलो तालाब में अपने,
कमल मोहक खिलाएँ हम।
सुमन आवाज देते हैं,
चलो सींचे बगीचों को,
चमन मैं आज फिर से,
कुछ नये पौधे उगाएँ हम।
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मंगलवार, 17 अक्टूबर 2017
गीत "दीप खुशियों के जलें" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
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आओ फिर से हम नये, उपहार की बातें करें
प्यार का मौसम है, आओ प्यार की बातें करें।
नेह की लेकर मथानी, सिन्धु का मन्थन करें,
छोड़ कर छल-छद्म, कुछ उपकार की बातें करें।
आस का अंकुर उगाओ, दीप खुशियों के जलें,
प्रीत का संसार है, संसार की बातें करें।
भावनाओं के नगर में, छेड़ दो वीणा के सुर,
घर सजायें स्वर्ग सा, मनुहार की बातें करें।
कदम आगे तो बढ़ाओ, सामने मंजिल खड़ी,
जीत के माहौल है, क्यों हार की बातें करें।
जिधर देखो, उधर ही है, बोलबाला “रूप” का,
सादगी के साथ हम, अधिकार की बातें करें।
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सोमवार, 16 अक्टूबर 2017
दोहे "सबको दो उपहार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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