-- हर रोज रंग अपना, मौसम बदल रहा है। घर-द्वार तो वही है, आँगन बदल रहा है।। -- सूरज नियम से उगता, चन्दा नियम से आता। कल-कल निनाद करता, झरना ग़ज़ल सुनाता। पतझड़ के बाद अपना, उपवन बदल रहा है। घर-द्वार तो वही है, आँगन बदल रहा है।। -- उड़ उड़के आ रहे हैं, पंछी खुले गगन में। परदेशियों ने डेरा, डाला हुआ चमन में। आसन वही पुराना, शासन बदल रहा है। घर-द्वार तो वही है, आँगन बदल रहा है।। -- महफिल में आ गये हैं, नर्तक नये-नवेले। बेजान हैं तराने, शब्दों के हैं झमेले। हैरत में है ज़माना, दामन बदल रहा है। घर-द्वार तो वही है, आँगन बदल रहा है।। -- |
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गुरुवार, 25 जनवरी 2024
गीत "मौसम बदल रहा है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
बुधवार, 24 जनवरी 2024
गीत "कुहरे ने रंग जमाया है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
-- सन-सन
शीतल चली पवन, सर्दी
ने रंग जमाया है। ओढ़
चदरिया कुहरे की, सूरज
नभ में शर्माया है।। -- जलते
कहीं अलाव, सेंकता बदन कहीं है कालू, कोई
भूनता शकरकन्द को, कोई भूनता आलू, दादा
जी ने अपने तन पर, मोटा
कम्बल लिपटाया है। ओढ़
चदरिया कुहरे की, सूरज
नभ में शर्माया है।। -- जितने
वस्त्र लपेटो, उतना ही ठण्डा लगता है, चन्दा
की क्या कहें, सूर्य भी शीत उगलता है, धूप
गुनगुनी पाने को, सबका
मन ललचाया है। ओढ़
चदरिया कुहरे की, सूरज
नभ में शर्माया है।। -- काजू
और बादाम स्वप्न जैसे लगते निर्धन को, मूँगफली
खाकर देते हैं सभी दिलासा मन को, गजक-रेवड़ी
के दर्शन कर, दिल
को समझाया है। ओढ़
चदरिया कुहरे की, सूरज
नभ में शर्माया है।। -- |
मंगलवार, 23 जनवरी 2024
दोहे "घना तुषारापात" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
|
-- कुहरा
नभ पर देख कर, सहमा हुआ पलाश। कैसे
आयेगा भला, उपवन में मधुमास।1। -- धूप
धरा पर है नहीं, ठिठुर रहा है गात। आशाओं
पर हो रहा, घना तुषारापात।2। -- टेसू
चिन्तित हो रहा, सरसों हुई उदास। सरदी
में कैसे उगे, जीवन में उल्लास।3। -- सूर्य
उत्तरायण हुआ, नहीं शीत का अन्त। थरथर-थरथर
काँपता, सिर पर खड़ा बसन्त।4। -- जाते-जाते
शीत तो, दिखा रही है रूप। घर-आँगन
में अभी भी, नहीं गुनगुनी धूप।5। -- प्राण
प्रतिष्ठा हो गयी, मची विश्व में धूम। हर्ष
और उल्लास से, लोग रहे हैं झूम।6। -- राम
कृपा से बन गया, भारत में संयोग। देख रहे सपना सभी, राम-राज का लोग।7। |
सोमवार, 22 जनवरी 2024
दोहे "प्राण-प्रतिष्ठा हो रही, गाओ मंगल-गीत" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
-- सारी
दुनिया जानती, भारत के हैं राम। मन्दिर
को श्री राम के, देना होगा मान।। -- नहीं
किसी की हार है, नहीं किसी की जीत। प्राण-प्रतिष्ठा
हो रही, गाओ मंगल-गीत।। -- न्याय-व्यवस्था
ने दिया, निर्णय सोच-विचार। श्री
राम का फैसला, कर लो अब स्वीकार।। -- सर्वोपरि
हैं देश में, नियम और कानून। मन
में मत रखना कभी, दुर्भावना-जुनून।। -- देते
हैं सन्देश ये, गीता और कुरान। कण-कण
में है रम रहा, राम और रहमान।। -- अभिलेखों
में दर्ज है, धाम अजुध्या-नाम। त्रेता
में पैदा हुए, इसी जगह श्री राम।। -- भावनाओं
के वेग में, बह मत जाना मित्र। रखना
हर हालात में, अपने साथ चरित्र।। -- अमन-नमन
का आज है, भारत में परिवेश। मत-मजहब
से है बड़ा, अपना प्यारा देश।। -- |
रविवार, 21 जनवरी 2024
दोहे "रामलला-रघुराज" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
-- राम
शताधिक वर्ष से, घर को थे मुहताज। अब आये निज सदन में, रामलला-रघुराज।1। -- जीत
हो गयी सत्य की, झूठ गया है हार। राम
नाम की विश्व में, होती जय-जयकार।2। -- मोदी-योगी
ने किया, रामचन्द्र का काज। अवधपुरी
में हो गया, श्री राम का राज।3। -- प्राण-प्रतिष्ठा
से हुआ, धन्य राम प्रासाद। न्यायालय
में न्याय से, पूरी हुई मुराद।4। -- पुरोषत्तम
श्री राम का, अब भी है आधार। महिमा
रघुवर की यहाँ, देख रहा संसार।5। -- अपने
भारत देश में, कण-कण में हैं राम। राम-कृपा
से हो रहे, पूरे सारे काम।6। -- सजा
लीजिए शान से, घर में बन्दनवार। हुआ
राम के नाम का, जन-जन में संचार।7। -- युगों-युगों
के बाद में, हुआ राममय देश। त्रेता
युग सा लग रहा, भारत का परिवेश।8। |
शनिवार, 20 जनवरी 2024
दोहे "राम लला का रूप" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
-- दर्शन कर लो राम के, मन्दिर बना अनूप। मन को बहुत लुभा रहा, राम लला का रूप।। -- सुर, नर-वानर कर रहे, जिनकी जय जयकार। ताकत को श्री राम की, मान गया संसार।। -- सात दिनों का है दिया, ईश्वर ने उपहार। अपने हृदय-कपाट के, बन्द करो मत द्वार।। -- धर्म ध्वजा लहरा रही, हुआ राम का घोष। प्राण-प्रतिष्ठा में नहीं, होता कुछ भी दोष।। आये हैं श्री राम जी, बनकर कृपा निधान। कोटि-कोटि वन्दन तुम्हें, पवनपुत्र हनुमान।। -- जिनके हृदय-अलिन्द में, रहते हैं श्रीराम। धीर-वीर,
रक्षक प्रबल, बलशाली-हनुमान।। -- |
शुक्रवार, 19 जनवरी 2024
दोहे "धन्य अयोध्या धाम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
-- जन-गण-मन की भावना, जन्मभूमि के साथ। राम-लखन सीता सहित, नमन आपको नाथ।1। -- ताकत का श्रीराम की, जिन्हें नहीं है बोध। वो मन्दिर निर्माण का, करते यहाँ विरोध।2। -- मन्दिर के निर्माण का, स्वप्न हुआ साकार। मानक के अनुसार ही, भवन हुआ तैयार।3। -- दीपक-धूप जलाइए, रोज सवेरे शाम। जो सबके मन में रमें, वो कहलाते राम।4। -- रहते जिनके साथ में, पवन पुत्र हनुमान। दिव्य पुरुष श्रीराम ही, जग के हैं भगवान।5। -- भारत के श्री राम थे, मिला राम को न्याय। राम भवन निर्माण का, पूर्ण हुआ अध्याय।6। -- कुछ दल आज विरोध से, नहीं आ रहे बाज। लेकिन उनके कृत्य से, जनता है नाराज।7। -- आया है शुभ दिवस अब, घर आयेंगे राम। मन्दिर बनने से हुआ, धन्य अयोध्या धाम।8। -- |
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