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बुधवार, 10 जून 2015

हृदय के उद्गार "केशव भार्गव "निर्दोष" की 8वीं पुण्यतिथि"

"कुछ उद्गार"

लगभग 40 साल पुराने
अपने अभिन्न कविमित्र
केशव भार्गव "निर्दोष" की 
8वीं पुण्यतिथि के अवसर पर
--
तुम पौध रोप कर चले गये, 
हम सींच रहे हैं उपवन को।
तुम अन्तरिक्ष में लीन हुए, 
हम खींच रहे हैं जीवन को।।

अपने समाज के लिए सदा, 
जीवनभर तुमने काम किया।
जितना जीवन पाया “केशव”, 
उस जीवन को भरपूर जिया।।

निष्ठा से सब कर्तव्य किये, 
कुछ नहीं पराजय को माना।
वो सब करके दिखलाया था, 
जो अपने मन में था ठाना।।

हे महा आत्मा! मेरे सब, 
श्रद्धा के सुमन समर्पित हैं।
उर से निकले उदगार सखा, 
आदर से तुमको अर्पित हैं।।

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