"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

बुधवार, 24 जून 2015

यात्रा संस्मरण "नेपाल के शहर महेन्द्रनगर की यात्रा" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

आज हम आपको पड़ोसी देश
नेपाल की सैर पर ले चलते हैं। 
नेपाल का एक बहुत ही
खूबसूरत शहर है महेन्द्र नगर।
        यहाँ पहुँचने के लिए आपको पहले बनबसा जाना पड़ेगा। यह वही बनबसा है जहाँ मैं सन् 1975 से 1985 तक 12 साल तक रहा था। पहले यह नैनीताल जिले में हुआ करता था मगर नैनीताल के मैदानी भाग को अलग करके एक नया जिला ऊधमसिंहनगर के नाम से बनाया गया तो बनबसा ऊधमसिंह नगर में चला गया गया। कालान्तर में पिथौरागढ़ जिले को दो भागों में विभक्त करके  में एक नया जिला चम्पावत के नाम से बनाया गया और ऊधमसिंहनगर जिले का बनबसा क्षेत्र चम्पावत में चला गया। मैंने बनबसा में ही कैनाल रोड मीनाबाजार में  अपना सुरुचिपूर्ण भवन भी बनाया था और यहीं पर मेरे छोटे पुत्र विनीत का जन्म हुआ था। उस समय बनबसा में लकड़ी के झाले (झोंपड़ियाँ) ही अधिक थीं। यहाँ तक मुझे याद है मेरा यह पक्का आवास गिनती के 10 मकानों में से एक था।
           बनबसा में वैसे तो आपको कुछ खास नही लगेगा पर जैसे ही आप नेपाल की ओर बढ़ेंगे। यहाँ के कुदरती नजारे आपका मन जरूर मोह लेंगे।
           यदि आप अपने वाहन/कार से आरहे हैं तो आपको सुबह 6 से 8, दोपहर 1 से 2 तथा शाम का 5 से 7 बजे तक बनबसा शारदा बैराज का गेट खुला मिलेगा।
       आप आराम से इन समयों में वाहन से शारदा नदी का पुल पार कर नेपाल में प्रवेश कर जायेंगे। इस बैराज मं 34 गेट बने हैं। जिसका नजारा बड़ा ही मनोहारी प्रतीत होता है।
             इस बैराज के पहले छोर पर शारदा मेन कैनाल है। जो भारत में बहती है तथा दूसरे किनारे पर एक नहर नेपाल के लिए निकाली गयी है।
          पुल पार करते ही आपको भारत की सीमा पर बने कस्टम व इमीग्रेशन की चेक पोस्ट पर अपनी एन्ट्री करानी होगी।
          डेढ़ किमी आगे जाने पर आपको नेपाल की सीमा पर बनी गड्डा-चौकी से दो -चार होना पड़ेगा। यानि वहाँ भी एन्ट्री करानी होगी। इसके लिए आपके पास वाहन के कागजात और ड्राइविंग लाइसेन्स का होना बहुत जरूरी है।
         यदि आप अपने वाहन से नही आ रहे हैं तो आपको रिक्शा या घोड़ा-ताँगा का सहारा लेना पड़ेगा। जिस पर सफर करने का अपना अलग ही आनन्द है। सारे नजारे आप बहुत अच्छी तरह से देखते हुए चले जायेंगे।

        बनबसा से महेन्द्र नगर की दूरी 8-9 किमी की है। लगभग 1 घण्टे का समय रिक्शा वाले या तांगे वाले वहाँ तक पहुँचने में लगाते हैं।
       महेन्द्र नगर जाने पर आपको यहाँ के बाजार में विदशी सामानों से पटी हुई दूकाने मिलेंगी। आप आराम से शापिंग कर सकते हैं परन्तु बहुत ही सीमित मात्रा में।
      यहाँ के रेस्टोरेन्टों में और ढाबों में आपको चाय-पानी और मीट के अलावा शराब भी खुले रूप से बिकती हुई मिलेंगी।
महेन्द्र नगर से 1 किमी दूर 
आपको सिद्धबाबा का मन्दिर भी मिलेगा।
आप यहाँ आकर प्रसाद चढ़ाये 
और सच्चे मन से मनौती माँग कर
अपने घर को लौटें।
सिद्धबाबा आपकी हर मनौती को पूर्ण करेंगे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails