मन-सुमन
खिलकर बहुत अच्छा लगा बरसात
में मिलकर बहुत अच्छा लगा बाग में
चहका बहारों का चमन साथ
में चलकर बहुत अच्छा लगा दूर
अब सारे गिले-शिकवे हुए मैल
को धुलकर बहुत अच्छा लगा प्यार
के सैलाब में जब फँस गये ताल
में पलकर बहुत अच्छा लगा हाथ
में रेशम की डोरी आ गयी चाकेदिल
सिलकर बहुत अच्छा लगा ख्वाब
का दरिया हकीकत सा लगा बदन
को मलकर बहुत अच्छा लगा रुप
के बादल बरसकर थम गये आग
में जलकर बहुत अच्छा लगा |
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आज के समय में मन को कुछ तो अच्छा लगा, यह टॉनिक जैसा है खुश रहने के लिए,, सच भी वर्तमान में खुश रहकर ही जीना ही समझदारी है,वरना दुःख क्या कम है लादने के लिए,,
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छी प्रस्तुति,,,