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शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

"अलख जगाएँ जन-जन में" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

उठो साथियों वक्त आ गया, अपनी शक्ति दिखाने का।
वसुन्धरा को काले अंग्रेजों से, मुक्त कराने का।।

बहुत समय के बाद आज फिर, गांधी ने अवतार लिया।
भ्रष्टाचार मिटाने को, सत्याग्रह का व्रत धार लिया।।

देख आमरण अनशन को, सरकार हो गई जब आहत।
नकली आँसू बहा-बहाकर, देती है झूठी राहत।।

डाँवाडोल हो रहा अब तो, मक्कारों का सिंहासन।
गद्दारों का जल्दी ही, अब छिनने वाला है आसन।।

भोली-भाली मीनों का अब होगा काम तमाम नहीं।
घड़ियालों का मानसरोवर में, होगा विश्राम नहीं।।

नाती-पोतों के शासन की परम्परा नहीं छायेगी।
जनता पर जनता के शासन की अब बारी आयेगी।।

गर्दन को जो नाप सके, अब लोकपाल वो आयेगा।
घूसखोर कितना बलिष्ट हो इससे बच ना पायेगा।।

जुग-जुग जिएँ हमारे अन्ना, अलख जगाएँ जन-जन में।
रिश्वतखोरी के विकार अब, कभी न आयें तन-मन में।।

25 टिप्‍पणियां:

  1. अपनी ओछी हरकतों और नीच सोच से अभी भी बाज नहीं आ रहे। कल 50-60 लोगों ने नशे में धुत हो राम-लीला मैदान के बाहर हुड़दंग किया।

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह वाह ..........बहुत ख़ूब !

    मन प्रसन्न कर दिया शास्त्रीजी !

    गर्दन को जो नाप सके, अब लोकपाल वो आयेगा।
    घूसखोर कितना बलिष्ट हो इससे बच ना पायेगा।।

    बहुत ख़ूब........

    उत्तर देंहटाएं
  3. भोली भाली मानो का अब होगा काम तमाम नहीं। घड़ियालों का मानसरोवर में, होगा विश्राम नहीं॥
    वहा !!! सर बहुत खूब .... शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  4. समसामयिक अच्छी प्रस्तुति ..

    जन जन जाग रहा है पर जन के नेता अभी भी सोये पड़े हैं

    उत्तर देंहटाएं
  5. भोली-भाली मीनों का अब होगा काम तमाम नहीं।
    घड़ियालों का मानसरोवर में, होगा विश्राम नहीं।।

    वाह वाह - गजब

    आपको, रचना को और परम आदरणीय अन्ना जी को सादर वंदन

    उत्तर देंहटाएं
  6. ऐसी ओज भरी रचनाओं का आज बहुत महत्व है।

    उत्तर देंहटाएं
  7. भोली-भाली मीनों का अब होगा काम तमाम नहीं।
    घड़ियालों का मानसरोवर में, होगा विश्राम नहीं।।
    नाती-पोतों के शासन की परम्परा नहीं छायेगी।
    जनता पर जनता के शासन की अब बारी आयेगी।।आस जगाती अन्ना में ,विश्वास बढ़ाती अन्ना में ,अन्ना शाश्त्री सांसत छायी शासन में .बहुत अर्थ पूर्ण जोशीली रचना आश्वश्त करती सी .कल जो होगा शुभ ही होगा .
    ram ram bhai

    शुक्रवार, २६ अगस्त २०११
    राहुल ने फिर एक सच बोला .
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर आपके भाव अन्ना व् उनके अभियान के लिए "गर्दन को जो नाप सके, अब लोकपाल वो आयेगा।
    घूसखोर कितना बलिष्ट हो इससे बच ना पायेगा"

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत ही सुन्‍दर भावमय करती प्रस्‍तुति ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. गर्दन को जो नाप सके, अब लोकपाल वो आयेगा।
    घूसखोर कितना बलिष्ट हो इससे बच ना पायेगा।।

    यही उम्मीद है सभी को

    उत्तर देंहटाएं
  11. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  12. अक्षरश: सत्‍य कहा है आपने ..सार्थक एवं सटीक लेखन ।

    उत्तर देंहटाएं
  13. जुग-जुग जिएँ हमारे अन्ना, अलख जगाएँ जन-जन में।
    रिश्वतखोरी के विकार अब, कभी न आयें तन-मन में।।
    दिल के अन्दर जोश जगाने वाली कविता ...
    बहुत ही अच्छी ....

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  14. उठो साथियों वक्त आ गया, अपनी शक्ति दिखाने का।
    वसुन्धरा को काले अंग्रेजों से, मुक्त कराने का।।

    sarthak rachna ke liye badhai, kash aapki ye rachna her jagruk vyakti tak pahuch sake..........aabhar

    उत्तर देंहटाएं
  15. bhrastachar unmulan mahayagya mein aahuti ki tarah hai aapki ye rachna..yagya kund se uthne wali khusboo aaur bedi ke charo taraf faili mantro ki gunj jis tarah batabaran ko urjamay kar deti hai kuch baise hi yah rachna har pathak ko urja may kar deti hai.ek aapne bada kiya tha ki blog per ab aana jata hota rahega..per shayad aap ye bada bhul gaye.sadar pranam aaur amantran ke sath..

    उत्तर देंहटाएं
  16. काव्यात्मक रूप में न केवल समर्थन है अपितु आह्वान भी है.
    आपसे मेरा विशेष अनुरोध कि
    यदि मीडिया और ब्लॉग जगत में अन्ना हजारे के समाचारों की एकरसता से ऊब गए हों तो कृपया मन को झकझोरने वाले मौलिक, विचारोत्तेजक आलेख हेतु पढ़ें तथा अपने बहुमूल्य विचारो से अवश्य अवगत कराये.
    अन्ना हजारे के बहाने ...... आत्म मंथन http://sachin-why-bharat-ratna.blogspot.com/2011/08/blog-post_24.html

    उत्तर देंहटाएं
  17. सुन्दर सामयिक कविता !

    यह भी पढ़े -----एक आन्दोलन जिसने देश में भावनात्मक एकता कायम की

    उत्तर देंहटाएं
  18. उठो साथियों वक्त आ गया, अपनी शक्ति दिखाने का।
    वसुन्धरा को काले अंग्रेजों से, मुक्त कराने का।।
    oj pooran rachna

    ese hi josh ki jroorat hai desh ko

    उत्तर देंहटाएं

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