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जन्म हिमालय पर लिया, नमन आपको मात।
शैलसुता के नाम से, आप हुईं विख्यात।।
कठिन तपस्या से मिला, ब्रह्मचारिणी नाम।
तप के बल से पा लिया, शिवशंकर का धाम।।
चन्द्र और घंटा रहे, जिनके हरदम पास।
घंटाध्वनि से हो रहा, दिव्यशक्ति आभास।।
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जगजननी माता बनी, जग की सिरजनहार।
कूष्मांडा ने रचा, सारा ही संसार।।
मूरख भी ज्ञानी बने, कृपा करे जब मात।
स्कन्दमाता अब धरो, मेरे सिर पर हाथ।।
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योग-साधना से मिटे, क्षोभ-लोभ औ’ काम।
माता कात्यायिनी का, बैजनाथ है धाम।।
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कालरात्री का करो, सच्चे मन से जाप।
दुर्गाजी निज भक्त का, हर लेती हैं ताप।।
सद्यशक्ति का पुंज हैं, देती हैं परित्राण।
महागौरि श्वेताम्बरा, करती हैं कल्याण।।
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देती सारी सिद्धियाँ, सिद्धिदात्रि मात।
नवमरूप में रम रहीं, माता सबके साथ।।
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मर्यादा की जीत है, मक्कारी की हार।
विजयादशमी विजय का, है पावन त्यौहार।।
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गुरुवार, 2 अक्टूबर 2014
"नवदुर्गा-नमन आपको मात" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
बुधवार, 1 अक्टूबर 2014
"सूचना"
मान्यवर,
दिनांक 18-19 अक्टूबर को खटीमा (उत्तराखण्ड) में बाल साहित्य संस्थान द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय बाल साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
जिसमें एक सत्र बाल साहित्य लिखने वाले ब्लॉगर्स का रखा गया है।
हिन्दी में बाल साहित्य का सृजन करने वाले इसमें प्रतिभाग करने के लिए 10 ब्लॉगर्स को आमन्त्रित करने की जिम्मेदारी मुझे सौंपी गयी है।
कृपया मेरे ई-मेल
roopchandrashastri@gmail.com
पर अपने आने की स्वीकृति से अनुग्रहीत करने की कृपा करें।
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
सम्पर्क- 07417619828, 9997996437
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"सारे जग से न्यारा गांधी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
!! श्रद्धापूर्वक नमन !!
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सत्य, अहिंसा का पथ जिसने, दुनिया को दिखलाया।
सारे जग से न्यारा गांधी, सबका बापू कहलाया।।
भाले-बरछी, तोप-तमञ्चे, हथियारों को छोड़ दिया,
देश-भक्ति के नारों से, जनता का मानस जोड़ दिया,
स्वतन्त्रता
का मन्त्र अनोखा, तुमने ही तो बतलाया।
सारे जग से न्यारा गांधी, सबका बापू कहलाया।।
गंगा, यमुना,सरस्वती की, भारत में बहती धारा,
राम, कृष्ण,गौतम,गांधी का
देश यही प्यारा-प्यारा,
इसीलिए तो
देवजनों ने, इसी भूमि को अपनाया।
सारे जग से न्यारा गांधी, सबका बापू कहलाया।।
दो अक्टूबर को भारत में,गांधी ने अवतार लिया,
लालबहादुर ने भी इस पावन माटी से प्यार किया,
जय-जवान और जय-किसान का नारा सबको सिखलाया।
सारे जग से न्यारा गांधी, सबका बापू कहलाया।।
लोकतन्त्र की आहुति बनकर, दोनों ने बलिदान दिया,
महायज्ञ की बलिवेदी पर, अपना जीवन दान किया,
धन्य-धन्य हे पुण्य प्रसूनों! तुमने उपवन महकाया।
सारे जग से न्यारा गांधी, सबका बापू कहलाया।।
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"ग़ज़ल-झूठ की तकरीर बच गयी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
जल गये ख़तूत, पर तहरीर बच गयी
लुट गये असबाब, पर जागीर बच गयी
झेलें हैं बहुत
हादसे, जीवन की जंग में
तदवीर काम आ गयी,
तकदीर बच गयी
गैरों की दासताँ से
तो, आजाद हो गये
बाँधी हुई अपनों की
तो, जंजीर बच गयी
हम खा रहे हैं शौक से. भाषण के निवाले
महफिल में सिर्फ झूठ
की, तकरीर बच गयी
पेड़ों की कोपलों
पे, बुढ़ापा सा आ गया
लेकिन हमारे “रूप”
की, तस्वीर बच गयी
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