बचा हुआ जो नेह है, उसको रहा सहेज। बुझने से पहले दिया, जलता कितना तेज।। -- क्या जायेगा साथ में, करलो जरा विचार। आने-जाने के लिए, खुले हुए हैं द्वार।। -- जब हो जाता नीड़ का, जीर्ण-शीर्ण आकार। हंस नहीं करता कभी, तब उसको स्वीकार।। -- माटी कैसी भी रहे, रचता जाय कुम्हार। कर देता है चाक पर, नया पात्र तैयार।। -- जीते जी ही जगत में, होता हाहाकार। मर जाने के बाद में, बचता लोकाचार।। -- सोच-समझकर कीजिए, लोगों से संवाद। दुनिया में इंसान की, नेकी आती याद।। -- रुकता-थकता है नहीं, कभी काल का चक्र। सीधी-सच्ची राह पर, चलना कभी न वक्र।। -- |
| "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। मित्रों! आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। |
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बुधवार, 15 सितंबर 2021
दोहे "रचता जाय कुम्हार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
मंगलवार, 14 सितंबर 2021
गीत "अपनी भाषा हिन्दी" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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रविवार, 12 सितंबर 2021
"13 सितम्बर-मेरे पुत्र का जन्मदिन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
जो वर माँगे महादेव से, पूरे वो वरदान हो गये। नितिन तुम्हारे आ जाने से पूरे सब अरमान हो गये।। मेरे आँगन के उपवन में, मुरझाये सब सुमन खिल गये। नीरस जीवन, सरस हो गया, सब अनुपम उपहार मिल गये। सूने मन के आँगन-उपवन, वासन्ती उद्यान हो गये। नितिन तुम्हारे आ जाने से, पूरे सब अरमान हो गये।। वर्ष छियालिस बीत गये हैं, जल्दी-जल्दी जाने कैसे। पंख लगाकर वक्त उड़ रहा, जाने क्यों लगता है ऐसे। पगडण्डी पर चलनेवाले, वाहन सभी विमान हो गये। पूरे सब अरमान हो गये।। सपने जो देखे थे मैंने, आज सभी साकार हो गये। पौत्र-पौत्री और पुत्र अब, जीवन का आधार हो गये। सच सारे अनुमान हो गये। पूरे सब अरमान हो गये।। जब तक मेरा साया तुम पर, तब तक रहे सलामत बचपन। कोई अन्तर नहीं समझना, उम्र छियालिस हो या पचपन। मात-पिता के आशीषों से, निर्धन सब धनवान हो गये। पूरे सब अरमान हो गये।। कोरोना का संकट, जब मेरे जीवन पर आया था, दिवस-रैन मेरी सेवा कर, तुमने धर्म निभाया था, मेरी इस जर्जर काया में, स्थापित फिर प्राण हो गये। |
शुक्रवार, 10 सितंबर 2021
संस्मरण "मेरा पुनर्जन्म" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
पुनर्जन्म की
प्रक्रिया (कोरोना से पूर्व मेरा स्वास्थ्य) मित्रों! उस दिन 2021 की 23 अप्रैल थी। मुझे अचानक तीव्र खाँसी और बुखार की शिकायत हो गयी। मैंने इसे बहुत हल्के में लिया और प्रतिदिन की भाँति अपने चिकित्सालय में भी बैठा। मेरे बिल्कुल पड़ोस में एक सर्जन का अस्पताल है। वो जैसे ही 11 बजे अपने घर से हास्पीटल की ओर जाने लगे तो दुआ-सलाम हुई। मैंने उनसे कहा कि मुझे कल से खाँसी और बुखार जैसा लग रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं, आप एजिथ्रोमाइसिन-500 की गोली लीजिए। मैंने उनकी सलाह मानी लेकिन बीमारी बहुत बढ़ गयी। पता लगा कि कोरोना हुआ है। मेरे कारण ही परिवार में सभी को कोरोना हो गया लेकिन वो सब 10-12 दिन में ठीक हो गये। कोविड उन दिनों चरम पर था और हास्पीटलों
में जगह नहीं थी। खैर प्रयास करने पर स्थानीय स्वास्तिक अस्पताल के कोविड वार्ड
में मुझे आई.सी.यू. में भर्ती कर लिया गया। अस्पताल के मालिक डॉ. विपिन अग्रवाल
ने बताया कि आप हमारे दादा जी स्व. घनश्याम दास जी के मित्रों में रहे हैं।
इसलिए मैंने आपको अस्पताल में भर्ती किया है। तीन-चार दिन अस्पताल की आई.सी.यू. में रहने के बाद मेरी हालत में सुधार होने लगा तो मुझे जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। 12 दिन में वहाँ मैं कोरोना से मुक्त हो गया और अस्पताल से डिस्चार्ज होकर अपने घर आ गया। लेकिन भूख बिल्कुल समाप्त हो गयी थी। ऑक्सीजन के सिलिंडर और दूध के बल पर 2 महीने गुजर गये। उसके बाद ऑक्सीजन का सिलिंडर तो हट गया। लेकिन स्वास्थ्य बहुत गिर गया। मैं बिल्कुल चल नहीं पाता था। किन्तु मेरे सफाई कर्मचारी ने पुत्र से भी बढ़कर मेरी मेरी सब तरह से सेवा की और मैं अब थोड़ा-थोड़ा चलने लगा हूँ। (वर्तमान में मेरा स्वास्थ्य) यदि आज मैं जीवित हूँ तो अपने ज्येष्ठ पुत्र नितिन के
कारण हूँ। जिसने अपनी सेहत की परवाह न करते हुए रात दिन मेरी सेवा की है। शायद मेरा यह
पुनर्जन्म था। |
गुरुवार, 9 सितंबर 2021
गणेश चतुर्थी पर विशेष "गणनायक भगवान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
विघ्नविनाशक आप हो, सभी गणों के ईश। पूजा करते आपकी, सुर-नर और मुनीश।। -- करता है आराधना, मन से सकल समाज। बिना आपके तो नहीं, होता मंगल काज।। -- दीपों के त्यौहार में, होता दिव्य निवेश। घर में लाते हैं सभी, लक्ष्मी और गणेश।। -- पार्वतीनन्दन प्रभो, शिवजी के हो पूत। नहीं आपकी दृष्टि में, कोई वृन्द अछूत।। -- शुक्ल चतुर्थी से शुरू, चतुर्दशी अवसान। दस दिन रहता देश में, श्रद्धा का उन्वान।। -- सॉँझ-सवेरे आरती, उसके बाद प्रसाद। होता है दरबार में, घण्टा-ध्वनि का नाद।। -- गणनायक भगवान की, महिमा बहुत अनन्त। कृपा आपकी हो अगर, जीवन बने बसन्त।। -- मोदक हैं प्रिय आपको, गणनायक भगवान। बनकर वाहन आपका, मूषक हुआ महान।। |
मंगलवार, 7 सितंबर 2021
ग़ज़ल "दिल को बेईमान न कर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
भौंहें वक्र-कमान न कर लक्ष्यहीन संधान न कर ओछी हरक़त करके बन्दे दुनिया को हैरान न कर दीन-धर्म पर करके दंगे ईश्वर का अपमान न कर मन पर काबू करले प्यारे दिल को बेईमान न कर जल-जंगल से ही जीवन है दोहन और कटान न कर जो जनता को आहत करदे ऐसे कभी बयान न कर जिससे हो नुकसान वतन का ज़ारी वो फ़रमान न कर नहीं सलामत “रूप” रहेगा सूरत पर अभिमान न कर |
शनिवार, 4 सितंबर 2021
दोहे "अध्यापक की बात" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
राधाकृष्णन आपको, नमन हजारों बार। अध्यापक-दिन का दिया, भारत को उपहार।1। धन्य हुए गुरुजन सभी, पाकर यह सौगात। आओ आज के दिन करें, अध्यापक की बात।2। जो कहलाता था कभी, प्रभु से अधिक महान। आज घटा क्यों देश में, उस शिक्षक मान।3। अब कक्षोन्नति के लिए, गुरू बना सोपान। फिर कैसे हो पायगा, गुरुओं का सम्मान।4। जब से शिक्षा-दान का, बदल गया अन्दाज। तब से शिक्षक दिन बना, केवल एक रिवाज।5। बिकता महँगे दाम पर, गुरुओं के घर ज्ञान। गणित और विज्ञान की, खुली हुई दूकान।6। कहाँ पढ़ाएँ पाल्य को, अभिभावक हैरान। गली-गली में खुल गयीं, शिक्षा की दूकान।7। -- अध्यापकदिन पर सभी, गुरुवर करें विचार। बन्द करें अपने यहाँ, ट्यूशन का व्यापार।8। |
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