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बुधवार, 22 सितंबर 2021

दोहे "प्यार नहीं व्यापार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जीवन के पथ में मिले, जाने कितने मोड़।
लेकिन में सीधा चला, मोड़ दिये सब छोड़।। 

पग-पग पर मिलते रहे, मुझको झंझावात।
शह पर शह पड़ती रहीं, मगर न खाई मात।।

मैं आगे बढ़ता गया, भले लक्ष्य हो दूर।
नहीं उमर के सामने, कभी हुआ मजबूर।।

साधक कभी न हारता, साधन जाता हार।
सच्ची निष्ठा से मिलें, जीवन में उपहार।।

प्यार दिलों का मेल है, प्यार नहीं व्यापार।
ढोंगी का टिकता नहीं, अधिक दिनों तक प्यार।।

सम्बन्धों की नाव पर, है संसार सवार।
ममता-माया-मोह हैं, जीवन के आधार।।

लगे हमारे देश में, रोटी के उद्योग।
आते टुकड़े बीनने, यहाँ विदेशी लोग।।

8 टिप्‍पणियां:

  1. सम्बन्धों की नाव पर, है संसार सवार।
    ममता-माया-मोह हैं, जीवन के आधार।। सुंदर चिंतन पूर्ण रचना ।

    जवाब देंहटाएं
  2. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरुवार(२३-०९-२०२१) को
    'पीपल के पेड़ से पद्मश्री पुरस्कार तक'(चर्चा अंक-४१९६)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  3. प्यार दिलों का मेल है, प्यार नहीं व्यापार।
    ढोंगी का टिकता नहीं, अधिक दिनों तक प्यार।।

    सम्बन्धों की नाव पर, है संसार सवार।
    ममता-माया-मोह हैं, जीवन के आधार।।

    बिलकुल सच कहा आपने
    जीवन ऐसे ही चल रहा है संसार में सबका

    जवाब देंहटाएं
  4. प्यार दिलों का मेल है, प्यार नहीं व्यापार।
    ढोंगी का टिकता नहीं, अधिक दिनों तक प्यार।।
    हकीकत को बयां करती बहुत ही उम्दा रचना!

    जवाब देंहटाएं

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