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शनिवार, 4 दिसंबर 2021

गीत "48वीं वैवाहिक वर्षगाँठ-5 दिसम्बर, 2021" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

48वीं वैवाहिक वर्षगाँठ
(5 दिसम्बर, 2021)
--
बस इतना उपहार चाहिए।
ममता का आधार चाहिए।।

जीवन जीने की है आशा,
चलता रहता खेल-तमाशा,
सुर की मृदु झनकार चाहिए।
ममता का आधार चाहिए।।

वाद-विवाद भले फैले हों,
अन्तस कभी नहीं मैले हों,
आपस में मनुहार चाहिए।
ममता का आधार चाहिए।।

सबकी सुननाअपनी कहना,
बच्चों की बातों को सहना,
हरा-भरा परिवार चाहिए।
ममता का आधार चाहिए।।

पहले जैसा 'रूप' नहीं अब,
पहले जैसी धूप नहीं अब,
हमको थोड़ा प्यार चाहिए।
ममता का आधार चाहिए।।

साथी साथ निभाते रहना,
उपवन को महकाते रहना,
हँसी-खुशी संसार चाहिए।
ममता का आधार चाहिए।।

6 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय शास्त्रीजी, बहुत बहुत शुभकामनाएँ, बधाई व सादर प्रणाम आप दोनों को।

    जवाब देंहटाएं
  2. पहले जैसा 'रूप' नहीं अब,
    पहले जैसी धूप नहीं अब,
    हमको थोड़ा प्यार चाहिए।
    ममता का आधार चाहिए।।
    ... बहुत सुंदर हृदयस्पर्शी सृजन ।

    जवाब देंहटाएं
  3. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार
    (5-12-21) को "48वीं वैवाहिक वर्षगाँठ"
    ( चर्चा अंक4269)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
    --
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  4. शुभकामनाएं आदरणीय शास्त्री जी को विवाह वर्षगांठ पर |

    जवाब देंहटाएं
  5. आ0 सादर अभिवादन
    आपके वर्षगाँठ पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  6. प्रणाम शास्‍त्री जी, आपको 48वीं वैवाहिक वर्षगाँठ की हार्द‍िक बधाई। आज के द‍िन आपने क्‍या खूब ही ल‍िखा है क‍ि---वाद-विवाद भले फैले हों,
    अन्तस कभी नहीं मैले हों,
    आपस में मनुहार चाहिए।
    ममता का आधार चाहिए।। पुन: बधाई

    जवाब देंहटाएं

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