लुप्त हुआ है काव्य का, नभ में सूरज आज। बिनाछन्द रचना रचें, अब कल्पित कविराज।१। जिसमें होती गेयता, काव्य उसी का नाम। रबड़छन्द का काव्य में, बोलो क्या है काम।२। अनुच्छेद में बाँटिए, लिख करके आलेख। छन्दहीन इस काव्य का, रूप लीजिए देख।३। चार लाइनों में मिलें, टिप्पणियाँ चालीस। बिना परिश्रम शान्त हों, मन की सारी टीस।४। बिनाछन्द के मिल रही, जब तारीफ तमाम। गद्यगीत भी पा गया, कविता का आयाम।५। अपना माथा पीटता, दोहाकार मयंक। गंगा में मिश्रित हुई, तालाबों की पंक।६। कथा और सत्संग में, कम ही आते लोग। यही सोचकर हृदय का, कम हो जाता रोग।७। गीत-ग़ज़ल में चल पड़ी, फिकरेबाजी आज। कालजयी रचना कहाँ, पाये आज समाज।८। देकर सत्साहित्य को, किया धरा को धन्य। तुलसी, सूर-कबीर से, हुए न कोई अन्य।९। |
| "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। मित्रों! आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। |
बहुत सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंआधुनिक साहित्य पर समुचित कटाक्ष
जवाब देंहटाएंगीत-ग़ज़ल में चल पड़ी, फिकरेबाजी आज।
जवाब देंहटाएंकालजयी रचना कहाँ, पाये आज समाज।।
देकर सत्साहित्य को, किया धरा को धन्य।
तुलसी, सूर-कबीर से, हुए न कोई अन्य।।
एकदम सटीक बात
बढ़िया रचना
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर रचना
जवाब देंहटाएं