-- अभी गाँव के देवालय में बूढ़ा बरगद जिन्दा है। करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।। -- बाबू-अफसर-नेता करते, खुलेआम रिश्वतखोरी, जिनका खाते माल, उन्हीं से करते हैं सीनाजोरी, मक्कारी के जालों में, उलझा मासूम परिन्दा है। करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।। -- माँ-बहनों की लज्जा लुटती, गलियों में-बाजारों में, गुण्डागर्दी करने वाले, शामिल हैं सरकारों में, लालन-पालन करने वाला, परेशान कारिन्दा है। करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।। -- लोकतन्त्र में शासन करने के, सब ही अधिकारी हैं, कुटुम-कबीलों की इसमे, क्यों होती भागीदारी हैं, कब छोड़ोगे सिंहासन को कहता हर बाशिन्दा है। करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।। -- ओछी गगरी घनी छलकती, भरी हुई चुपचाप रहे, जिसकी दाढ़ी में तिनका है, वही ज्ञान की बात कहे, घोटाले करने वाला ही, करता चुगली-निन्दा है। करतूतों को देख हमारी होता वो शरमिन्दा है।। -- |
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