-- योग-ध्यान का दे दिया, अब जग को सन्देश। विश्वगुरू कहलायगा, फिर से भारत देश।१। -- खुश होकर अपना रहे, नर-नारी अब योग। भारत के पीछे चले, दुनियाभर के लोग।२। -- पातंजलि की राह पर, चलने लगा हुजूम। रामदेव के योग की, दुनियाभर में धूम।३। -- ऋषि-मुनियों के योग से, होंगे सभी निरोग। भोगवाद को छोड़कर, अपनायेंगे योग।४। -- भारत ने ही दिया था, अपना योग सुझाव। राष्ट्रसंघ में हो गया, पारित यह प्रस्ताव।५। -- अल्प-अवधि में सभी ने, मान लिया अनुरोध। नहीं किसी भी देश ने, इसका किया विरोध।६। -- पिछले दशकों में नहीं, जागी थी सरकार। वर्तमान सरकार ने, किया सपन साकार।७। -- जैसे-जैसे आ रहा, योग-दिवस नज़दीक। कट्टरपन्थी छोड़ कर, लोग हुए निर्भीक।८। -- योग-दिवस का बन गया, आज सुखद-संयोग। सबको करना चाहिए, नित्य-नियम से योग।९। -- आया मास अषाढ़ का, योग कर रहे सन्त। धरा-गगन मिलते जहाँ, होता वही दिगन्त।१०। -- नद-नाले सूखे पड़े, सूख गये हैं ताल। गरमी के कारण हुए, जन्तु सभी बेहाल।११। -- मौसम अब तक था नहीं, लोगों के अनुरूप। अनल बरसता गगन से, बदन जलाती धूप।१२। -- सूखे बाग-तड़ाग सब, उड़ती भू पर धूल। खेतों में पसरे हुए, चारों ओर बबूल।१३। -- तकते सब आकाश को, बरसे सरस फुहार। इन्द्रदेव की कर रहा, सारा जग मनुहार।१४। -- बादल छाये गगन पर, सूरज हुआ विलीन। बारिश आने का हुआ, सबको आज यकीन।१५। -- लगा रहे मन में सभी, बरखा का अनुमान। पीला नभ ये कह रहा, आयेगा तूफान।१६। -- दुनियाभर में बन गया, योग-दिवस इतिहास। योगासन सब कीजिए, अवसर है यह खास।१७। -- मानुष जन्म मिला हमें, करने को शुभकाम। पापकर्म करके इसे, मत करना बदनाम।१८। -- थोड़े से ही योग से, काया रहे निरोग।। तन-मन को निर्मल करे, योग भगाए रोग।१९। -- जगतनियन्ता ईश ने, हमको दिया विधान। जीवन जीने के लिए, राह चुनों आसान।२०। -- सरदी-गरमी हो भले, चाहे हो बरसात। करना योग प्रचार को, देश-नगर देहात।२१। -000- |
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योग-ध्यान का दे दिया, अब जग को सन्देश।
जवाब देंहटाएंविश्वगुरू कहलायगा, फिर से भारत देश।
.,योग का बहुत बढ़िया सन्देश देती रचना