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कुहरा करता है मनमानी।
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कहता पापी पेट हमारा,
बिना कमाए नही गुजारा,
काम बिना नहीं कोई चारा,
श्रम करने से जी न चुराओ,
ऋतुएँ तो हैं आनी जानी।
जाड़े पर छा गयी जवानी।।
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चूल्हे और अलाव जलाओ,
गर्म-गर्म भोजन को खाओ, काम समय पर सब निबटाओ,
खाना, सोना और कमाना,
जीवन की है यही कहानी। जाड़े पर छा गयी जवानी।। |










