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शुक्रवार, 4 दिसंबर 2015

"पाँच दिसम्बर-हमारी वैवाहिकवर्षगाँठ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


बस इतना उपहार चाहिए।
ममता का आधार चाहिए।।

माना यौवन-रूप नहीं अब,
पहले जैसी धूप नहीं अब,
हमको थोड़ा प्यार चाहिए।
ममता का आधार चाहिए।।

जीवन जीने की है आशा,
चलता रहता खेल-तमाशा,
सुर की मृदु झनकार चाहिए।
ममता का आधार चाहिए।।

वाद-विवाद भले फैले हों,
अन्तस कभी नहीं मैले हों,
आपस में मनुहार चाहिए।
ममता का आधार चाहिए।।

सबकी सुनना, अपनी कहना,
बच्चों की बातों को सहना,
हरा-भरा परिवार चाहिए।
ममता का आधार चाहिए।।

साथी साथ निभाते रहना,
उपवन को महकाते रहना,
हँसी-खुशी संसार चाहिए।
ममता का आधार चाहिए।।

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