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शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

गीत "शिव आराधना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हे नीलकंठ हे महादेव!
हे नीलकंठ हे महादेव!
तुम पंचदेव में महादेव!!

तुम विघ्नविनाशक के ताता
जो तुमको मन से है ध्याता
उसका सब संकट मिट जाता
भोले-भण्डारी महादेव!
तुम पंचदेव में महादेव!!

कर्ता-धर्ता-हर्ता सुधीर
तुम सुरसेना के महावीर
दुर्गम पर्वतवासी सुबीर
हे निराकार-साकार देव!
तुम पंचदेव में महादेव!!

नन्दी तुमको लगता प्यारा
माथे पर शशि को है धारा
धरती पर सुरसरि को तारा
हे कालकूट हे महादेव!
तुम पंचदेव में महादेव!!

त्रिशूल. जटा, डमरूधारी
दुष्टों के हो तुम संहारी
बाघम्बरधारी वनचारी
हे दुष्टदलन, हे महादेव!
तुम पंचदेव में महादेव!!
जय हो जय, शिव-शंकर की जय!
जो शिवलिंग की पूजा करता
वो पापकर्म से है डरता
भवसागर से वो ही तरता
उस पर करते तुम कृपा देव!
तुम पंचदेव में महादेव!! 

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