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रविवार, 12 फ़रवरी 2017

दोहे "आलिंगन उपहार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जो दिल से उपजे वहीहोता सच्चा प्यार।
मिलन नहीं है वासनाआलिंगन उपहार।१।

पश्चिम के परिवेश कीले करके हम आड़।
आलिंगन के नाम परकरते हैं खिलवाड़।२।

एकदिवस के लिए क्योंकरते हो व्यापार।
जीवनभर करते रहोमीठा-मीठा प्यार।३।

मानवता अपनाइएयही हमारा मन्त्र।
वासनाओं के लिए क्योंढोंग और षड़यन्त्र।४।

अपनाओ निज सभ्यताछोड़ विदेशी ढंग।
आलिंगन के साथ होजीवनभर का संग।५।

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