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मंगलवार, 4 अगस्त 2020

गीत "यह धरा देवताओं की जननी रही" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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जिसकी माटी में चहका हुआ है सुमन,
मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।
जिसकी घाटी में महका हुआ है पवन,
मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।
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जिसके उत्तर में अविचल हिमालय खड़ा,
और दक्षिण में फैला है सागर बड़ा.
नीर से सींचती गंगा-यमुना चमन।
मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।।
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वेदकुरआन-बाइबिल का पैगाम है,
ज़िन्दगी प्यार का दूसरा नाम है,
कामना है यही हो जगत में अमन।
मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।।
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सिंह के दाँत गिनता, जहाँ पर भरत,
धन्य आजाद हैं और विस्मिल-भगत,
प्राण आहूत करके किया था हवन।
मुझको प्राणों से प्यारा है अपना वतन।।
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यह धरा देवताओं की जननी रही,
धर्मनिरपेक्ष दुनिया में है ये मही,
ऐसे भारत को करता हूँ शत्-शत् नमन।
मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।।
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2 टिप्‍पणियां:

  1. वेद, कुरआन-बाइबिल का पैगाम है,
    ज़िन्दगी प्यार का दूसरा नाम है,
    कामना है यही हो जगत में अमन।
    मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।।
    --
    सिंह के दाँत गिनता, जहाँ पर भरत,
    धन्य आजाद हैं और विस्मिल-भगत,
    प्राण आहूत करके किया था हवन।
    मुझको प्राणों से प्यारा है अपना वतन।।
    --
    यह धरा देवताओं की जननी रही,
    धर्मनिरपेक्ष दुनिया में है ये मही,
    ऐसे भारत को करता हूँ शत्-शत् नमन।

    मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।।


    सार्थक बहु -रंगी इतिहासिक सामयिक प्रसंगों को समकालीन गीतों में पिरोना शास्त्री जी का हुनर है या सरस्वती का आशीष कैसे कहूँ ?

    वीरुभाई (वीरेंद्र शर्मा )


    vageeshnand.blogspot.com , veeruvageesh.blogspot.com , veerusa.blogspot.com ,veeujan.blogspot.com

    वीरुभाई (वीरेंद्र शर्मा )

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    जवाब देंहटाएं
  2. देशभक्तिपूर्ण सुन्दर रचना । हार्दिक बधाई ।

    जवाब देंहटाएं

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