बेटी
से आबाद हैं, सबके घर-परिवार। बेटों
जैसे दीजिए, बेटी को अधिकार।। -- चाहे
कोई वार हो, कोई हो तारीख। दिवस
सभी देते हमें, कदम-कदम पर सीख।। जगदम्बा
के रूप में, लेती जो अवतार। उस
बेटी से कीजिए, बेटों जैसा प्यार।। बेटी
रत्न अमोल है, कुदरत का उपहार। बेटों
जैसे दीजिए, बेटी को अधिकार।१। -- दुनिया
में दम तोड़ता, मानवता का वेद। बेटा-बेटी
में बहुत, जननी करती भेद।। बेटा-बेटी
के लिए, हों समता के भाव। मिल-जुलकर
मझधार से, पार लगाओ नाव।। बेटी
रत्न अमोल है, कुदरत का उपहार। बेटों
जैसे दीजिए, बेटी को अधिकार।२। -- पुरुषप्रधान
समाज में, नारी का अपकर्ष। अबला
नारी का भला, कैसे हो उत्कर्ष।। कृष्णपक्ष
की अष्टमी, और कार्तिक मास। जिसमें
पुत्रों के लिए, होते हैं उपवास।। ऐसे
रीति-रिवाज को, बार-बार धिक्कार। बेटों
जैसे दीजिए, बेटी को अधिकार।३। -- घर
में अगर न गूँजती, बिटिया की किलकार। माता-पुत्री-बहन
का, कैसे मिलता प्यार।। बेटी
का घर-द्वार में, है समान अधिकार। लालन-पालन
में करो, पुत्र समान दुलार। लालन-पालन
में करो, पुत्र समान दुलार। बेटों
जैसे दीजिए, बेटी को अधिकार।४। -- जिस
घर में बेटी रहे, समझो वे हरिधाम। दोनों
कुल का बेटियाँ, करतीं ऊँचा नाम।। कुलदीपक
की खान को, देते क्यों हो दंश। बिना
बेटियों के नहीं, चल पायेगा वंश।। अगर
न होती बेटियाँ, थम जाता संसार। बेटों
जैसे दीजिए, बेटी को अधिकार।५। -- बेटी
को शिक्षित करो, उन्नत करो समाज। लुटे
नहीं अब देश में, माँ-बहनों की लाज।। एक
पर्व ऐसा रचो, जो हो पुत्री पर्व। व्रत-पूजन
के साथ में, करो सुता पर गर्व।। बेटी
सेवा धर्म से, नहीं मानती हार। बेटों
जैसे दीजिए, बेटी को अधिकार।६। -- शिक्षित
माता हों अगर, शिक्षित हों सन्तान। माता
बनकर बेटियाँ, देतीं जग को ज्ञान।। संविधान
में कीजिए, अब ऐसे बदलाव। माँ-बहनों
के साथ मैं, बुरा न हो बर्ताव।। क्यों
पुत्रों की चाह में, रहे पुत्रियाँ मार। बेटों
जैसे दीजिए, बेटी को अधिकार।७। -- |
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बहुत खूबसूरत रचना
जवाब देंहटाएंबेटी दिवस पर, बेटियां तो मन प्राण होती है
खूबसूरत रचना
जवाब देंहटाएं--
जवाब देंहटाएंपुरुषप्रधान समाज में, नारी का अपकर्ष।
अबला नारी का भला, कैसे हो उत्कर्ष।।
कृष्णपक्ष की अष्टमी, और कार्तिक मास।
जिसमें पुत्रों के लिए, होते हैं उपवास।।
ऐसे रीति-रिवाज को, बार-बार धिक्कार।
बेटों जैसे दीजिए, बेटी को अधिकार।३।.. बहुत सुंदर सार्थक रचना,इस पंक्ति में कही बात बिलकुल सटीक है,आपको मेरा अभिवादन आदरणीय शास्त्री जी 🙏🙏
बहुत ही सुंदर सृजन आदरणीय सर।
जवाब देंहटाएंसादर
बेटियों के सम्मान में सुंदर भाव सृजन।।
जवाब देंहटाएंबेटी को शिक्षित करो, उन्नत करो समाज।
जवाब देंहटाएंलुटे नहीं अब देश में, माँ-बहनों की लाज।।
एक पर्व ऐसा रचो, जो हो पुत्री पर्व।
व्रत-पूजन के साथ में, करो सुता पर गर्व।।
बेटी सेवा धर्म से, नहीं मानती हार।
बेटों जैसे दीजिए, बेटी को अधिकार।६।
एक एक पंक्ति आपकी दिल को छू रही है
काश कि सब ऐसा सोचते😒
बेटियों के लिए इतनी अच्छी सोच रखने के लिए और इतनी अच्छी रचना लिखने के लिए आपका तहे दिल से बहुत बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सर🙏
बहुत ही सुन्दर रचना
जवाब देंहटाएंराष्ट्रीय पर्व पर आपको हार्दिक शुभकामनाएं 💐