जब हर घर में जन्मते, दुनिया में इंसान। मानवता का क्यों हुआ, फिर जग में अवसान।। -- देख दशा संसार की, हुए हौसले पस्त। भरी दुपहरी में हुआ, मानो सूरज अस्त।। -- मान और अपमान का, नहीं किसी को ध्यान। सरे आम इंसान का, बिकता है ईमान।। -- भरे पड़े इस जगत में, बड़े-बड़े धनवान। श्री के बिन कैसे कहें, उनको हम श्रीमान।। -- जीने का जब सीखना, चाहा हमने ढंग। बढ़ीं व्यस्तताएँ तभी, समय हो गया तंग।। -- आपस में लड़ते नहीं, राम और रहमान। फिर मानव क्यों उलझता, बन करके नादान।। -- दुनिया में बिखरे हुए, भाँति-भाँति के रंग। मत-मजहब के फेर में, मानवता है भंग।। -- सबके पूजा-पाठ के, अलग-अलग हैं ढंग। पन्थ भले ही भिन्न हों, भारत के सब अंग।। -- |
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वर्तमान हालात का सही चित्रण
जवाब देंहटाएंसमसामयिक समस्याओं का उल्लेख करते सुंदर सार्थक दोहे
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