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शुक्रवार, 22 अप्रैल 2016

दोहे "ले परिणाम टटोल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

जितने धरती पर हुए, राजा, रंक-फकीर।
ब्रह्मलीन सबका हुआ, भौतिक तत्व शरीर।।
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पल-पल में है बदलता, काया का ये रूप,
ढल जायेगी एक दिन, रंग-रूप की धूप।।
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ग्रह और नक्षत्र की, चाल रही है वक्र।
आने-जाने का सदा, चलता रहता चक्र।।
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अगले पल क्या घटेगा, कुछ भी नहीं गुमान।
अमर समझ कर जी रहा, हर जीवित इंसान।।
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सोच-समझ कर बोलना, अपने मुख से बोल।
कहने से पहले जरा, ले परिणाम टटोल।।
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