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बुधवार, 20 अप्रैल 2016

बालकविता "मुझको पतंग बहुत भाती है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों! 
"बालहंस" के जनवरी II अंक में 
मेरी बालकविता
♥ मुझको पतंग बहुत भाती है ♥
नभ में उड़ती इठलाती है।
मुझको पतंग बहुत भाती है।।

रंग-बिरंगी चिड़िया जैसी,
लहर-लहर लहराती है।।

कलाबाजियाँ करती है जब,
मुझको बहुत लुभाती है।।

इसे देखकर मुन्नी-माला,
फूली नहीं समाती है।।

पाकर कोई सहेली अपनी,
दाँव-पेंच दिखलाती है।।

बहुत कष्ट होता तब मुझको।
जब पतंग कट जाती है।।

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