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मंगलवार, 5 दिसंबर 2017

दोहा गीत "पैंतालिसवीं वैवाहिक वर्षगाँठ"


मृग छौने की चाल अब, हुई बैल की चाल।
धीरे-धीरे कट रहे, दिवस-महीने-साल।।
--
जीवन के संग्राम में, किया बहुत संघर्ष।
वैवाहिक जीवन हुआ, आज चवालिस वर्ष।
पात्र देख कर शिष्य को, ज्ञानी देता ज्ञान।
श्रम-सेवा परमार्थ से, मिलता जग में मान।।
जो है सरल सुभाव का, वो ही है खुशहाल।
धीरे-धीरे कट रहे, दिवस-महीने-साल।
--
सजनी घर के काम में, बँटा रही है हाथ।
चैन-अमन से कट रहा, जीवन उसके साथ।।
अपने-अपने क्षेत्र में, करते सब उद्योग।
पुत्र-पौत्र-बहुएँ सभी, करती हैं सहयोग।।
अब जीवन-संगीत में, मिले हुए सुर-ताल।
धीरे-धीरे कट रहे, दिवस-महीने-साल।
--
सरल-तरल है जिन्दगी, बहती सुख की धार।
एक नेक मुझको मिला, सुन्दर सा परिवार।।
होते रहते हैं कभी, आपस में मतभेद।
लेकिन घरवाले नहीं, रखते हैं मनभेद।।
हल कर देता है समय, सारे कठिन सवाल।
धीरे-धीरे कट रहे, दिवस-महीने-साल।
--
जीवन के पथ में भरे, कदम-कदम पर मोड़।
जिस पथ से मंजिल मिले, कभी न उसको छोड़।।
बैठे गंगा घाट पर, सन्त और शैतान।
देना सदा सुपात्र को, धन में से कुछ दान।।
करके दान कुपात्र को, होता बहुत मलाल।
धीरे-धीरे कट रहे, दिवस-महीने-साल।

6 टिप्‍पणियां:

  1. पैंतालीसवीं वैवाहिक वर्षग़ाँठ पर आप दोनो के लिये ढेरों मंगलकामनाएं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. पैंतालीसवीं वर्षगाँठ पर हृदयपूर्वक बधाई। शुभकामनाएँ एवं सादर प्रणाम।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर पैगाम
    पैंतालिसवीं वैवाहिक वर्षगाँठ पर बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!

    उत्तर देंहटाएं
  4. The main thing is to feel contended and happy .All these yrs have witnessed a positive person in you .God has showered a blissful life to a select few .You are one from them.Mubarak Sirji ,Bhabhi Sahiba .

    उत्तर देंहटाएं

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