सबके अपने ढंग हैं, सबके अलग रिवाज। श्राद्ध पक्ष में कीजिए, विधि-विधान से काज।। -- मात-पिता को मत कभी, देना तुम सन्ताप। पितृपक्ष में कीजिए, वन्दन-पूजा-जाप।। -- जिनके पुण्य-प्रताप से, रिद्धि-सिद्धि का वास। उनका कभी न कीजिए, जीवन में उपहास।। -- वंशबेल चलती रहे, ऐसा वर दो नाथ। पितरों का तर्पण करो, भक्ति-भाव के साथ।। -- अभ्यागत को देखकर, होना नहीं उदास। पूरे श्रद्धाभाव से, रक्खो व्रत-उपवास।। -- जग में आवागमन का, चलता रहता चक्र। अन्तरिक्ष में ग्रहों की, गति होती है वक्र।। -- अच्छे कामों को करो, सुधरेगा परलोक। नेकी के ही कर्म से, फैलेगा आलोक।। -- |
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पितृ पक्ष के अवसर पर सुंदर बोध देते दोहे !
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (11-9-22} को "श्रद्धा में मत कीजिए, कोई वाद-विवाद"(चर्चा अंक 4549) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
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कामिनी सिन्हा
माता-पिता तथा अन्य परिवारजन के परलोक सिधारने के पश्चात हर वर्ष उनके श्राद्ध करने से लाख गुना अच्छा होगा कि हम जीते जी उनका मान-सम्मान और सेवा-सुश्रूषा करें.
जवाब देंहटाएंश्राद्ध के दिनों में ढोंगी पंडितों का पेट और उनकी झोली भरने से यह बेहतर होगा कि हम अपने पुरखों के नाम पर विद्यादान, औषधिदान तथा ऐसे ही कुछ अन्य परोपकारी तथा समाजोपयोगी कार्यों में बढ़-चढ़ कर अपना योगदान दें.
माता पिता क़े और पूर्वजों क़े तर्पण पर आधारित सुंदर रचना!--साधुवाद!--ब्रजेन्द्र नाथ
जवाब देंहटाएंपारम्परिक विचारों के सुंदर दोहे।
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