विजयादशमी (दशहरा) की हार्दिक शुभकामनाएँ! रावण या रक्तबीज! दशहरा है राक्षसों के गगनचुम्बी पुतले मैदान में सजे हैं रामलीला मैदान में मेला लगा है लोगों की भीड़ में श्री राम के जय के उद्घोष के साथ पुतलों का के साथ युद्ध शुरू हो चुका था नवयुग की यही तो मर्दानगी है। -- चार बालाएँ गुम हो गई हैं बार-बार एक ही प्रश्न मन में उठ रहा था "रावण को तो राम ने रामलीला में मार दिया है’’ फिर किस से राक्षस ने चार सीताओं का हरण किया। -- रावण आमआदमी नहीं रक्तबीज है कोई एक मरता है हजार जन्म ले लेते हैं उन्हीं में से किसी ने इन चार सीताओं का हरण किया होगा! |
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रावण को हर रोज़ मारना पड़ता है...आज रावण का रूप बदल गया है...पहचानना मुश्किल है...सुन्दर रचना...👍
जवाब देंहटाएंपुतलों का के साथ
जवाब देंहटाएंयुद्ध शुरू हो चुका था
नवयुग की
यही तो मर्दानगी है। .... बहुत खूब कहा शास्त्री जी, अब नवयुग की इस मर्दानगी के कारण ही मेले में से चार सीताऐं यूं गायब हो गईं...वाह बहुत सुंदर रचना
अच्छी रचना
जवाब देंहटाएंसत्य सार्थक भावपूर्ण रचना
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