आज प्रस्तुत है! " भूली हुई याद " |
एक भूली हुयी याद मेरे दिल को दुखा जाती है। तेरी तस्वीर मेरे दिल के आईने में समा जाती है।। सिलसिला प्यार की यादों का फिर नहीं थमता, वेवजह आके तेरी याद सता जाती है। ये न पूछो कि मेरे कैसे दिन और रात कटे, याद आती है तेरी दिल मेरा दीवाना बना जाती है। घिर के यादों में निकलने का रास्ता नहीं मिलता, आग तन-मन में मेरे अब भी लगा जाती है। अब तो कांटे नहीं करती हैं अंधेरी रातें, मेरे जज्बात को ‘बदनाम’ बना जाती है। गुरू सहाय भटनागर "बदनाम" आवास-विकास, खटीमा (उत्तराखण्ड) |




