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मंगलवार, 12 अक्तूबर 2010

“.. ..जिन्दगी की मुकम्मल गजल!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

ganga-2दीन-दुखियों के दुख से हों आँखें सजल।
है वही जिन्दगी की मुकम्मल गजल।।

झूठी रस्म-औ-रवायत से जो लड़ सके,
जो ज़माने के दस्तूर को दे बदल।
है वही जिन्दगी की ……………….।।

कल तलक हो रहे थे जो जुल्म-ओ-सितम,
अब दिलों में दिखाई न दे वो गरल।
है वही जिन्दगी की ……………….।।

दें रसीले फलों को उगें वो शजर,
कोई बोये न अब कण्टकों की फसल।
है वही जिन्दगी की ……………….।। 
ganga polution शुद्ध गंगा को इतनी न मैली करो,
इसमें डालो न अब गन्दगी और मल।
है वही जिन्दगी की ……………….।। 
मिटने पाये न अब सम्पदा देश की,  
होने पाये न दूषित धरातल विमल।
है वही जिन्दगी की ……………….।।

एकता-भाईचारा सलामत रहे,
हों दिलों में सभी के मुहब्बत तरल।
है वही जिन्दगी की ……………….।।
(चित्र गूगल छवि से साभार)

21 टिप्‍पणियां:

  1. दीन-दुखियों के दुख से हों आँखें सजल।
    है वही जिन्दगी की मुकम्मल गजल।।

    क्या गज़ल लिखी है ………………आज तो ज़िन्दगी को आईना दिखा दिया……………हर शब्द एक सुन्दर संदेश दे रहा है……………चित्रमयी गज़ल पढवाने का बहुत बहुत आभार और बधाई इतनी प्यारी गज़ल के लिये।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर ग़ज़ल , देखिये किस तरह हिंदी उर्दू के गले लग रही है , ये भी भाईचारा है .
    बाकी सारे सन्देश तो आपने अपनी ग़ज़ल में दे दिए हैं ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. दीन-दुखियों के दुख से हों आँखें सजल।
    है वही जिन्दगी की मुकम्मल गजल।।

    बहुत ही भावपूर्ण और प्रासंगिक भी.....सुंदर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  4. दीन-दुखियों के दुख से हों आँखें सजल।
    है वही जिन्दगी की मुकम्मल गजल।।
    बहुत ही सुन्‍दर पंक्तियां, भावमय प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  5. उज्ज्वल भावों से संयुक्त एक उत्तम ग़ज़ल...बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपका गीत पढना अच्छा लगता है। रचनाएं प्रेरक होती हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  7. अपकी यह पोस्ट अच्छी लगी।
    तीन गो बुरबक! (थ्री इडियट्स!)-2 पर टिप्पणी के लिए आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर ओर भाव्पुर्ण कविता धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत ही भावपूर्ण और सुन्दर रचना है बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  10. झूठी रस्म-औ-रवायत से जो लड़ सके,
    जो ज़माने के दस्तूर को दे बदल।
    है वही जिन्दगी की ……………….।

    बहुत खूबसूरत गज़ल ..

    उत्तर देंहटाएं
  11. झूठी रस्म-औ-रवायत से जो लड़ सके,
    जो ज़माने के दस्तूर को दे बदल ...

    सच कहा है शास्त्री जी ... जिंदा दिली तो इसे ही कहते हैं .... बहुत अच्छी ग़ज़ल है .....

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत ही भावमयी रचना ... शुभकानाएं

    उत्तर देंहटाएं
  13. .

    एकता-भाईचारा सलामत रहे,
    हों दिलों में सभी के मुहब्बत तरल। ...

    एक खूबसूरत सन्देश देती ग़ज़ल ।

    आभार आपका ।

    .

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत ख़ूबसूरत और भावपूर्ण गज़ल! बढ़िया लगा!

    उत्तर देंहटाएं
  15. यह सचमुच संवेदना को झकझोरने वाली गज़ल है ।

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत ही भावपूर्ण सुंदर रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  17. सुन्दर भावोँ से सजी बहुत ही अच्छी गजल...

    उत्तर देंहटाएं

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