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रविवार, 10 अक्तूबर 2010

“आज फिर उदास मन : डॉ.चन्द्रशेखर जोशी” (प्रस्तोता-डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

अपनी व्यस्त चर्या में से समय निकाल कर 
डॉ.चन्द्रशेखर जोशी आज सुबह-सुबह ही 
मेरे पास आ गये और कहने लगे-
“शास्त्री जी! अचानक आज यह भाव मेरे मन में आये हैं। 
कृपया आप इसे उच्चारण पर लगा दीजिए।"
प्रस्तुत है उनकी यह रचना!
"मैं बारिश के साथ रोया"
"मैं बारिश के साथ रोया"

आज फिर उदास मन
जैसे कोई मीत खोया
छुपाने को निकले आँसू
मैं बारिश के साथ रोया

तन-मन तार-तार भिगोया
सुख-दुख इक हार पिरोया
लगें पलकें तो फिर न जागूँ
ऐसे मैं उस रात सोया

उम्मीद खुशियाँ बेमानी हैं
पथ कँटीला किस्मत ने बोया
कुछ और साँसे बोझिल सही
जब बोझ अनचाहा इतना ढोया!
मैं बारिश के साथ रोया
csjoshi
डॉ.चन्द्रशेखर जोशी
प्रबन्ध-संचालक
जमुना मेमोरियल अस्पताल, खटीमा
(उत्तराखण्ड)

20 टिप्‍पणियां:

  1. कमबख़्त मन की आदत ही है, जब तब उदास हो जाना। मेरे साथ भी अक्सर ऐसा ही होता हे।...अच्छी लगी आपकी कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (11/10/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. शास्त्री जी यह पोस्ट बहुत अच्छी लगी |बहुत भावपूर्ण
    है बधाई
    मुझे आपकी टिप्पणी का अपनी हर पोस्ट पर इन्तजार रहता है क्यों कि वह बहुत सही होती है |
    आपको भी नव रात्रि की हार्दिक शुभ कामनाएं |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  4. सही बात है. कभी-कभी बरसात मन को बोझिल भी करती है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. उम्मीद खुशियाँ बेमानी हैं
    पथ कँटीला किस्मत ने बोया
    कुछ और साँसे बोझिल सही
    जब बोझ अनचाहा इतना ढोया!
    मैं बारिश के साथ रोया
    उदासी के पलों को शब्द दे कर खूबसूरत बना दिया। उदासी भी जीवन मे जरूरी है नही तो खुशी की पहचान क्या रह जायेगी।डा. जोशी जी को बहुत बहुत शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बढ़िया लिख रहे है चन्द्रशेखर जी और यहाँ उन्हे प्रस्तुत कर आप और भी बढ़िया काम कर रहे हैं । यह अभिव्यक्ति पाठकों तक पहुँचाकर ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. "तन-मन तार-तार भिगोया
    सुख-दुख इक हार पिरोया
    लगें पलकें तो फिर न जागूँ
    ऐसे मैं उस रात सोया "...
    कहा जा रहा है कि डॉक्टर असंवेदनशील होते जा रहे हैं.. डॉ. जोशी जी की यह रचना उनके कोमल ह्रदय को दिखा रही हैं.. आशा है उनकी यह कोमलता उनके पेशे में आकर लोगों को लाभान्वित कर रही होगी.. सुंदर कविता है..

    उत्तर देंहटाएं
  8. आज फिर उदास मन
    जैसे कोई मीत खोया
    छुपाने को निकले आँसू
    मैं बारिश के साथ रोया

    बहुत संवेदनशील रचना ..

    उत्तर देंहटाएं

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