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गुरुवार, 14 अक्तूबर 2010

"भूली हुई याद : गुरूसहाय भटनागर बदनाम" प्रस्तोता:डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

आज प्रस्तुत है! 
गुरू सहाय भटनागर "बदनाम" की रचना!
"
भूली हुई याद
"
एक भूली हुयी याद मेरे दिल को दुखा जाती है।

तेरी तस्वीर मेरे दिल के आईने में समा जाती है।।

सिलसिला प्यार की यादों का फिर नहीं थमता,
वेवजह आके तेरी याद सता जाती है।

ये न पूछो कि मेरे कैसे दिन और रात कटे,
याद आती है तेरी दिल मेरा दीवाना बना जाती है।

घिर के यादों में निकलने का रास्ता नहीं मिलता,
आग तन-मन में मेरे अब भी लगा जाती है।

अब तो कांटे नहीं करती हैं अंधेरी रातें,
मेरे जज्बात को ‘बदनाम’ बना जाती है।

गुरू सहाय भटनागर "बदनाम"
आवास-विकास, खटीमा
(उत्तराखण्ड)

9 टिप्‍पणियां:

  1. सिलसिला प्यार की यादों का फिर नहीं थमता,
    वेवजह आके तेरी याद सता जाती है ।

    गुरू सहाय भटनागर बदनाम जी रचना बहुत बढ़िया लगी ... आभार प्रस्तुति के लिए

    उत्तर देंहटाएं
  2. गुरू सहाय भटनागर बदनाम जी रचना बहुत अच्छी लगी ... आभार प्रस्तुति के लिए

    उत्तर देंहटाएं
  3. आप ओर आप के परिवार को दुर्गाष्टमी की बधाई
    बहुत सुंदर रचना, धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. " behatarin rachana "

    एक भूली हुयी याद मेरे दिल को दुखा जाती है।

    तेरी तस्वीर मेरे दिल के आईने में समा जाती है।।

    ---- eksacchai { AAWAZ }

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर रचना....प्रस्तुति के लिए आभार ...

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह वाह …………बहुत ही सुन्दर गज़ल्। हर शेर बेहतरीन्।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ, भटनागर जी से परिचय कराने का आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुंदर रचना, दुर्गा नवमी एवम दशहरा पर्व की हार्दिक बधाई एवम शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं

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