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बुधवार, 22 अप्रैल 2015

"मेरी सर्वाधिक लोकप्रिय रचना-नेताओं का चरित्र" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

इन्साफ की डगर परनेता नही चलेंगे।
होगा जहाँ मुनाफाउस ओर जा मिलेंगे।।

दिल में घुसा हुआ है,
दल-दल दलों का जमघट।
संसद में फिल्म जैसा,
होता है खूब झंझट।
फिर रात-रात भर मेंआपस में गुल खिलेंगे। 
होगा जहाँ मुनाफा उस ओर जा मिलेंगे।।

गुस्सा व प्यार इनका,
केवल दिखावटी है।
और देश-प्रेम इनका,
बिल्कुल बनावटी है।
बदमाशमाफिया सब, इनके ही घर पलेंगे।
होगा जहाँ मुनाफाउस ओर जा मिलेंगे।।

खादी की केंचुली में,
रिश्वत भरा हुआ मन।
देंगे वहीं मदद ये,
होगा जहाँ कमीशन।
दिन-रात कोठियों मेंघी के दिये जलेंगे।
होगा जहाँ मुनाफाउस ओर जा मिलेंगे।।

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें.

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