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बुधवार, 29 जुलाई 2015

"पूज्य पिता जी आपको शत्-शत् नमन..." (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आज ही के दिन 
पिछले वर्ष आप विदा हुए थे..
पूज्य पिता जी आपको शत्-शत् नमन...!! 
पूज्य पिता जी आपकावन्दन शत्-शत् बार।
बिना आपके हो गयाजीवन मुझ पर भार।।
एक साल बीता नहींमाँ भी गयी सिधार।
बिना आपके हो रहादुखी बहुत परिवार।।
--
बचपन मेरा खो गयाहुआ वृद्ध मैं आज।
सोच-समझकर अब मुझे, करने हैं सब काज।।
--
जब तक मेरे शीश पररहा आपका हाथ।
लेकिन अब आशीष काछूट गया है साथ।।
--
प्रभु मुझको बल दीजिएउठा सकूँ मैं भार।
एक-नेक बनकर रहेमेरा ये परिवार।।

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