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मंगलवार, 21 मार्च 2017

दोहे "बदलेंगे अब ढंग" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दुनियाभर में छा गया, अपना भगवा रंग।
जीवन शैली के यहाँ, बदलेंगे अब ढंग।।
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आता जब अच्छा समय, होता सब अनुकूल।
खिलते जाते हैं पंक में, कमल-कुमुद के फूल।।
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अच्छे कामों में सदा, आते हैं अवरोध।
चूहें-छिपकलियाँ करें, रवि का बहुत विरोध।।
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सूरज रखता है नहीं, कभी किसी से बैर।
वसुन्धरा पर सभी की, सदा मनाता खैर।।
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करता देश समाज से, जो भी सच्चा प्यार।
नौका को पतवार से, कर देता वो पार।।
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रामचन्द्र के नाम पर, जिसने किया विवाद।
जन-मानस ने देश के, किया उसे बरबाद।।
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दीन दुखी को चाहिए, शासन में इंसाफ।
कूड़ा-करकट-गन्दगी, करो देश से साफ।।

1 टिप्पणी:

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