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मंगलवार, 26 सितंबर 2017

दोहे "हरकत हैं नापाक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


देख रहा करतूत को, होकर मूक जहान।
पाल रहा आतंक को, कैसे पाकिस्तान।।
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भारत में पकड़े गये, पाकिस्तानी दूत।
राष्ट्रसंघ को चाहिएँ, कितने और सबूत।।
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इतने पर भी बोलता, पाक झूठ पर झूठ।
जब अच्छा माहौल हो, तब ही जाता रूठ।।
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नाम भले ही पाक हो, हरकत हैं नापाक।
बन्दर देकर घुड़कियाँ, जमा रहा है धाक।।
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हमने करके युद्ध को, दिखा दिया आवेश।
भारत के कारण बना, अलग बाँगलादेश।।
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भारतमाता हाथ में, रखती है त्रिशूल।
टकराने की मत कभी, तुम कर देना भूल।।
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युद्ध हुआ अब यदि कभी, देंगे नाम मिटाय।
फिर से वन्देमातरम, नक्शे में हो जाय।।

2 टिप्‍पणियां:

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