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बुधवार, 27 सितंबर 2017

दोहे "जग में माँ का नाम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

देते शिक्षा जगत को, माता के नव रूप।
सबको रहना चाहिए, माता के अनुरूप।।

माता के उपकार का, कैसे करूँ बखान। 
प्रतिदिन होना चाहिए, माता का सम्मान।।

ममता का पर्याय है, जग में माँ का नाम।
माँ की पूजा से मिलें, हमको चारों धाम।।

सच्चे मन से माँ सदा, देती है आशीष।
चरण-युगल में मातु के, रोज नवाना शीश।।

माता ने जीवन दिया, दुनिया दी दिखलाय।
माता के ऋण से कभी, मुक्ति नही मिल पाय।।

 दुर्गा पूजा की मची, जगह-जगह पर धूम।
पहन मुखौटे राम के, लोग रहे हैं घूम।।

सदा राम के काम को, करना लोगों याद।
सच्चाई की राह में, करना नहीं विवाद।।

3 टिप्‍पणियां:

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